आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में शरण मेरा रजोहरण विषय पर प्रवचन का आयोजन

मोहन टाॅकीज में होगी चार दिवसीय विशेष प्रवचन श्रेणी

रतलाम, 1 दिसंबर। मानव भव को सार्थक बनाना है तो हमें चार प्रश्न स्वयं से पूछने चाहिए- सुख कैसा पसंद है, सुख किसका पसंद है, सुख किसके पास से मिले तो पसंद है और सुख के लिए कितना इंतजार करने के लिए तैयार है। यदि इन बातों का जवाब आपको मिल जाए और आपने उसे आत्मसात कर लिया तो आपका जीवन सफल होगा।
यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने शुक्रवार को मुमुक्षु निखिल कुमार के दीक्षा अवसर पर सैलाना वालो की हवेली मोहन टाॅकीज में शरण मेरा रजोहरण विषय पर आयोजित चार दिवसीय विशेष प्रवचन श्रेणी के पहले दिन कही। उन्होने कहा कि सुख हमें कैसा चाहिए- राग के जैसा, वैराग्य के जैसा या फिर वितराग के जैसा- यह हमें तय करना है। क्योकि राग का सुख फटाके के प्रकाश के जैसा हैए वैराग्य का सुख दीपक के प्रकाश के जैसा है और वितराग जैसा सुख सूर्य के प्रकाश के जैसा होता है। इनमें से हमें कौन सा प्रकाश चाहिए, यह हमें तय करना है।
दीक्षा के लिए मुमुक्षुनिखिल कुमार शनिवार को रतलाम आएंगे
जैन भागवती दीक्षा अंगीकार करने वाले मुमुक्षु निखिल कुमार शनिवार, दिसंबर को रतलाम आएंगे। उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में समाजजन रेलवे स्टेशन पर स्वागत के लिए पहुंचेंगे। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्री संघ, गुजराती उपाश्रय श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेतांबर पेढ़ी, रतलाम द्वारा धर्मालुजनों से अधिक से अधिक संख्या में पधारकर मुुमुक्षु का स्वागत अभिनंदन करने का आव्हान किया है।