अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज द्वारा की जा रही 40 दिवसीय “बसंत भद्र व्रत साधना” का आज महापारणा हुआ

कुंजवन उदगाँव । तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मती सागर जी महाराज की समाधी भूमि ” कुंजवन उदगाँव ” पर अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज द्वारा की जा रही 40 दिवसीय “बसंत भद्र व्रत साधना” का आज महापारणा हुआ।
557 दिन के मौन साधक तपस्वी मौन पूर्वक सिंह निष्क्रीडित व्रत(उत्तम) की साधना करने वाले विश्व मे प्रथम आचार्य अन्तर्मना 108 श्री प्रसन्न सागर जी महामुनिराज का तीर्थराज के स्वर्णभद्र कूट पर सम्पन्न किया। इसके बाद तपस्वी सम्राट के समाधि स्थली उदगाव में अन्तर्मना का भब्य चातुर्मास हुवा इसी कड़ी में इस बार भक्तों के मध्य अडोल , अकंप साधना करते हुए गुरुदेव , जो अनुपम , अनमोल , अद्भुत , अविस्मरणीय , अकल्पनीय तपस्या की कड़ी में एक अध्याय जोड़ते हुवे 40 दिन की मौन उपवास साधना प्रारंभ किया जिसका महापारणा आज उदगाव में सौम्य मूर्ति उपाध्याय मुनि 108 पीयूष सागर जी मुनिराज के निर्देशन में निरन्तराय आहार सम्पन्न हुवा इस महापारणा महोत्सव पर अन्तर्मना ने अपनी 40 दिन बाद मौन साधना खोलते हुवे कहा कि आज की पीढ़ी इक्ट्ठा करने के लिये जी रही है.. और पुरानी पीढ़ी इक्ट्ठा रहने के लिए जी रही थी।
दुनिया में सबसे बड़ा भ्रम है कि पैसा बढ़ने से हमारे घर परिवार और जीवन में सुख शान्ति बढ़ जायेगी। समझ नहीं आता कि आखिर क्यों ? भारत में जन्म लेकर कोई एक रोटी के लिए तरसता है और वही एक पड़ोसी का कुत्ता बेशकिमती गाड़ी में घूमता है। जिनके पास अपार धन राशि है, इसका मतलब यह तो नहीं कि वे बहुत सुख शान्ति और आनन्द का जीवन जी रहे हो ?
पैसा किसी के पास कुछ हो सकता है,, किसी के पास कुछ ज्यादा हो सकता है,, और किसी के पास बहुत ज्यादा हो सकता है.. फिर समझ नहीं आता कि एक रोटी के लिए तरस रहा है और एक कुत्ता बड़ी बड़ी गाड़ियों में धन पतियो की पत्नियो के साथ घुम रहा है। अरे भाई! जिनके पास धन कम है, वे दुनिया के सबसे अधिक खुश, सन्तुष्ट व्यक्ति भी तो हो सकते हैं। दुनिया में 07 तरह का धन है-
पहला धन स्वस्थ शरीर – अधिक पैसा होना ही सब कुछ नहीं है,, सेहत का ठीक होना भी बेहद ज़रूरी है। कुछ लोगों के पास धन तो बहुत है पर उनके सुख भोगने का, खाने पीने का सुख नहीं है। भारत में धन गरीब लोग कम है, मन गरीब लोग ज्यादा है। धन गरीब लोग स्वस्थ प्रसन्न मिलेंगे और मन गरीब लोग दुखी, परेशान, बीमार नजर आयेंगे।
दूसरा धन कामयाबी – बहुत से लोग अमीर घर में पैदा होने के बाद भी सफल नहीं हो पाते और वही एक गरीब चाय बेचकर सफलताओं के शिखर को छू लेता है।
तीसरा धन साहस-धैर्य ज़िन्दगी के हर कदम पर कांटे बिछे हैं,, स्वयं को ही देख भाल और सम्भल कर चलना होगा अन्यथः कांटा लग जाएगा।
चौथा धन मित्रता – निस्वार्थ भाव से एक दूसरे के सुख दुःख व में सहयोगी बनना। मित्रता से रहित हो। छल कपट और चाटुकारता से रहित हो
पांचवा धन कौशल-प्रतिभा किसी भी लक्ष्य को पाने के लिये केवल प्रयास ही पर्याप्त नहीं है,, उसके लिये कार्य कौशल की क्षमता भी होना चाहिए।
छठवां धन इज्जत या प्रतिष्ठा आपके पास अपार धन राशि है,, लेकिन घर परिवार और समाज में आपकी कोई इज्जत-प्रतिष्ठा नहीं है, तो वह अपार धन बेकार है।
सातवां धन सन्तोष – जो प्राप्त है,, वह पर्याप्त है। जो प्राप्त है, उसे पसंद करो और जो पसंद है, उसे प्राप्त करो। सन्तोष का अर्थ है –प्रभु इतना दीजिए, जा में कुटुम्ब समाय.. मैं भी भूखा ना रहूं, साधू ना भूखा जाये..!
इस अवसर पर गुरुभक्त परिवार शामिल हुवे
तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मती सागर जी महाराज की समाधी भूमि ” कुंजवन उदगाँव ” पर अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज द्वारा की जा रही 40 दिवसीय “बसंत भद्र व्रत साधना” का आज महापारणा हुआ एवं इसी के साथ गुरुदेव ने नये व्रत की घोषणा करते हुए संकल्प लिया।गुरुदेव ने नया व्रत ग्रहण किया जिसका नाम है – ” वज्र मध्य व्रत ” – यह व्रत 38 दिवसीय होगा जिसमे 29 उपवास एवं 9 पारणाये होंगी !
उदगाव महाराष्ट्र हो रहा है जहाँ एक तपस्या की एक अलग ऊर्जा है संध्या में आनंद यात्रा और गुरु भक्ति भक्तों ने किया। कोडरमा मीडिया प्रभारी जैन राज कुमार अजमेरा ने उक्त जानकारी दी।