अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में आज सहस्त्र बीजाक्षर द्वारा जनमंगल मंत्र अनुष्ठान का आयोजन किया गया

कुंजवन महोत्सव उदगांव का आज चौथा दिन

कुंजवन उदगाव (महाराष्ट्र ) 25 दिसम्बर। कुंजवन महोत्सव में आज मंत्र शक्ति का दिन रहा। मंत्रों की गूंज और उनकी अलोकिक उर्जा से भक्तों का साक्षात्कार होता रहा। सुबह प्रभु जाप के साथ ही अभिषेक शांतिधारा पूजा की गई। इसके बाद प्रारंभ हुआ सहस्त्र बीजाक्षर द्वारा जनमंगल मंत्र अनुष्ठान। इस दौरान बीजाक्षरोंयुक्त मंत्रों का प्रयोग किया गया। उत्कृष्ट सिंहनिष्कीडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज ने भक्तों को बीजाक्षरों के महत्व को भी समझाया। संध्याकाल में अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के मंगल प्रवचन आनंद यात्रा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही।
कुंजवन महोत्सव उदगांव का आज चौथा दिन रहा। यह दिन खास रहा, आज सहस्त्र बीजाक्षर द्वारा जनमंगल मंत्र अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इसमें भक्तों ने समूहिक रूप से भाग लिया। उत्कृष्ट सिंहनिष्कीडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज के श्रीमुख से खिरते बीचाक्षरोंयुक्त मंत्रों के स्वर उसके बाद सामूहिक रूप से बीजाक्षरों के उद्घोष ने संपूर्ण वातावरण को आलोकिक बना दिया। अज्ञात उर्जा का अदृष्य एक वर्तुल मंत्रों के मध्य उत्पन्न होता रहा। भक्त मंत्रों के मध्य झूमते रहे, उनमें खोते रहे, मंत्र शक्ति के प्रति समर्पित होते चले गये। कर्म निर्जरा के साथ ही पुण्योदय का प्रभाव व प्रताप में तलीन्न होते गये। बीजाक्षरों के मंत्रों के साथ होने वाली अनुष्ठानिक कियाएं भक्तों के लिए एक नया अनुभव रहा। भक्तों में उर्जा का वेग झलकने लगा, उनका जोश उत्साह उमंग में परिवर्तित होता रहा। मंत्र जाप करते भक्तों का उल्लास धीरे-धीरे अपने वेग पर पहुंच गया। गुरूवर्य के साथ भक्त इस अनुष्ठानिक क्रिया में इतना तल्लीन हो गये कि कब वह अनुष्ठान पूर्ण हो गया इसका उनको भान तक नहीं हुआ। ऐसा लगा जैसे वह नींद से जाग गये। अथवा संपूर्ण व्यक्तित्व में परिवर्तित हो गया। मंत्रों की शक्ति की उर्जा हमेशा एक नयेपन का अहसास या अनुभूतियों से भक्तों को अल्हादित करती रही। यहां यह उल्लेखनीय है सभी मंत्रों के पीछे एक शब्द का अर्थ छिपा रहता है। इसलिए ओम शब्द प्रथम व श्रेष्ठ माना जाता है। ओम मानव तंत्र का मूल अक्षर है, मानव तंत्र या हम कहें शरीर के अंदर होने वाले नाद का स्वर ओम ही होता है। इसके तमाम प्रमाण हैं। इसीलिए किसी भी मंत्र के साथ ऊं प्रथम अक्षर होता है। इसी तरह प्रत्येक बीजाक्षर का अलग-अलग महत्व है। सिर्फ बीजाक्षर का कोई महत्व नहीं होता। इस दौरान उत्कृष्ट सिंहनिष्कीडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्यश्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुये कहा कि मंत्रों को लेकर हमारे समाज में बहुत सी भ्रांतियां फैली हुई हैं। कुछ अज्ञानता और कुछ स्वार्थ के वशीभूत हैं। मंत्रों के नाम पर जाने क्या-क्या प्रचारित कर रखा है। यह सब आज से नहीं सैकड़ों वर्षों से चल रहा है। इस अज्ञानता की जड़े इतनी गहरी हैं कि अब लोगों को झूठ ही सच लगने लगा है। संध्याकाल में आचार्य श्री केप्रवचन हुये उसके बाद भक्तों ने आनंद यात्रा में अपने भावों को विभिन्न तरह से वयक्त किया। कार्यक्रम आयोजक श्री ब्रहम्नाथ पुरातन दिगंबर जैन मंदिर टस्ट कुंजवन उदगांव रहा।
कोडरमा मीडीया प्रभारी राज कुमार अजमेरा ने जानकारी देते हुए बताया कि आगामी कार्यकम 26 दिसंबर को यागमंडल विधान, गुरु कृपा व्रत संस्कार महोत्सव, 27 दिसंबर को मंदिर शुद्धि गर्भकल्याणक महोत्सव, 28 दिसंबर को जन्मकल्याणक 29 दिसंबर दीक्षा कल्याणक के कार्यकमों का आयोजन किया गया है। यह सभी कार्यकम उत्कृष्ट सिंहनिष्कीडित व्रतकर्ता-साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्यश्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज के सान्निध्य ओर उपाध्याय सौम्य मूर्ति 108 पीयूष सागर जी महाराज के निर्देशन में सभी कार्यक्रम हो रहा है।