
खाचरौद । अभिभाषक संघ खाचरौद के पूर्व अध्यक्ष एवं जिला पंचायत परिषद उज्जैन के पूर्व सदस्य चन्द्रप्रकाश चौरड़िया (एडवोकेट) ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को ई मेल के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित कर प्रदेश के संभाग व जिलों की सीमाओं की पुनर्संरचना पर विचार किए जाने की घोषणा का स्वागत किया है।
ज्ञापन में चौरड़िया ने विशेष रूप से मांग की है कि प्रदेश में जिला पुनर्गठन आयोग को नए सिरे से गठित कर नवीन जिले की मांगों का गहराई से अध्ययन के बाद प्राप्त अनुशंसा के आधार पर ही प्रदेश सरकार कोई निर्णय ले। समूचे प्रदेश की जनसंख्यात्मक व भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एवं जन-सुविधा व प्रशासकीय व्यवस्था का संतुलन बनाकर ही नवीन जिले बनाए जाए। अत्यधिक छोटे जिले की स्थापना से प्रदेश पर वित्तीय भोज बढ़ता है। वहीं नया जिला बनाने से उस क्षेत्र के विकास के द्वार खुलते है और कानून व प्रशासनीक व्यवस्था प्रभावी होती है।
चौरड़िया ने मुख्यमंत्री को स्मरण कराया कि पूर्व में मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 1983 में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री बी. पी. दुबे की अध्यक्षता में जिला पुनर्गठन आयोग गठित किया गया था। तत्समय आयोग के सदस्यों द्वारा प्रदेश में व्यापक भ्रमण कर जनसुनवाई की गई थी और उस आधार पर सरकार को नए जिले बनाने की अनुशंसा की थी। पुनः वर्ष 1998 में सरकार द्वारा सिंह देव कमिटी गठित कर जिले के संबंध में सिफारिशें मांगी गई थी।
चौरड़िया ने बताया कि बीते वर्षों में प्रदेश में राजनैतिक लाभ हानि के आधार पर आनन फानन में नवीन जिलों के गठन की घोषणाएं की गई है। जबकि उच्च न्यायालय के किसी वरिष्ठ न्यायाधीश की अध्यक्षता में जिला पुनर्गठन आयोग गठित किया जाता है तो नवीन जिले की मांगों की व्यवहारिकता का उचित आंकलन एवं व्यापक स्तर पर विचार विमर्श हो पाएगा।