अखिल भारतीय साहित्य परिषद शाखा जावरा की मासिक गोष्ठी राम धुन राष्ट्र धुन की थीम पर संपन्न हुई

जावरा (अभय सुराणा) । अखिल भारतीय साहित्य कला परिषद की मासिक गोष्ठी के कार्यक्रम की अध्यक्षता शहर के वरिष्ठ एडवोकेट श्री ईश्वर प्रसाद त्रिवेदी ने की । अपने प्रेरक उद्बोधन में आपने कहा कि देश विचारों से चलता है. जहां विचार समाप्त होते हैं वहां राष्ट्र भी समाप्त हो जाते हैं। राम भारत का विचार है, भारत की आत्मा है,भारत के प्राण है।
इज़राइल विचारों के दम पर ही 1800 वर्ष तक जीवित रहा और अंत में अपनी मातृभूमि प्राप्त की। स्वाधीनता के बाद भी हमारी पीढ़ियां सतीश चंद्रा, रोमिला थापर, राम पुनियानी, इरफ़ान हबीब जैसे वामपंथी इतिहासकारों का विकृत इतिहास पढ़ती रही. आज देश का सच्चा और राष्ट्रीय साहित्य नई पीढ़ी के पास जाना चाहिए. सर्वोत्तम राज्य राम राज्य ही माना जाता है. राम के बिना भारत भारत नहीं रहेगा. भारत का विचार जीवित रहना चाहिए. इसलिए जनसामान्य में भारत का विमर्श जाना आवश्यक है।मुख्य अतिथि सरस्वति शिशु मंदिर के संस्थापक सचिव श्री सुरेश मेहता ने अपने उद्बोधन में कहा कि बहुप्रतीक्षित राम जन्म भूमि में प्रभु राम की प्राण प्रतिष्ठा का यह राष्ट्र व्यापी जन उत्साह राष्ट्र निर्माण में लगना चाहिए ।हमारे लोकप्रिय एवम पथ प्रदर्शक प्रधान मंत्री माननीय मोदी जी का यह प्रबोधन राम से राष्ट्र और देव से देश तथा विरासत और विकास इस ध्येय को ध्यान में रखकर हम सबको अपनी क्षमता और सामर्थ्य से भारत के नव निर्माण एवम भारत माता को परम वैभव के शिखर पर पहुचाने में अपनी अपनी भूमिका सुनिश्चित करना चाहिए ।संस्था के अध्यक्ष डॉ प्रकाश उपाध्याय ने आव्हान किया कि राम ही राष्ट्र और राष्ट्र ही राम है । राम के बिना भारत की कल्पना ही संभव नहीं है । ये हमारी पीढ़ी का सौभाग्य है कि हमने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा अपने जीवन काल में देखी । अब समय है अपने आचरण में राम को उतारना है ।सिर्फ जय श्री राम के नारे से काम नहीं बनने वाला हम सब को मिलकर राम राज्य के लिए राम के परिश्रम ,पुरुषार्थ और मर्यादा को आत्मसात करना होगा ।कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि रमेश मनोहरा ,राजेंद्र त्रिवेदी ,मनोहर मधुकर ,विजय जैन ,कृष्ण कांत पोरवाल एवम डॉ प्रकाश उपाध्याय ने अपने राम मय सुमधुर गीतों एवम कविताओं से गोष्ठी को ऊंचाई प्रदान की । डॉ एस के वरुण ,राम चचलानी ,जय राका, उमेश अरोड़ा एवम बालकलाकार संजोत ने अपने सुमधुर भजनों से सदन को राम मय कर दिया । कार्यक्रम का शहर के प्रबुद्ध जनों ने आनंद लिया। अंत में आभार प्रदर्शन दिलीप सेठिया ने किया ।