



नासिक रोड जैन स्थानक 4 फरवरी 2024 । वह सत्य भी हिंसा का प्रतीक है जिसके बोलने से किसी के आत्म सम्मान को ठेस लगती हो। उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने संबोधित करते कहा कि जैसे सत्य से किसी का मर्म प्रकट हो कठोर छेदन कारी भेदनकारी पर पीड़ाकारी भाषा पाप का संचय करती है।
उन्होंने कहा कि सत्य शुभ मंगलकारी कल्याणकारी हो तभी आत्म उत्थान में सहयोगी बन सकता है सत्यम शिवम सुंदरम।
मुनि कमलेश ने बताया कि सागर के समान गंभीर बनकर कड़वी बातों को अपने में पचाले और मीठी बातों को मोती के रूप में जनता के सामने प्रस्तुत करें सबसे बड़ा धर्म है। जैन संत ने कहा कि सकारात्मक सोच सत्य है नकारात्मक सोच असत्य और जो मधुर रिश्तों में कड़वाहट घोलने का काम करते हैं वह महा पापी है।
उपाध्याय प्रवर श्री गौतम मुनि जी ने कहा कि संगठन एकता में सत्य की दुहाई देकर विघटन पैदा करते हैं अक्षम्यअपराध है।
हठयोगी धैर्य मुनि जी मंगल पाठ फरमाते हैं अनुष्ठान आराधिका महासती डॉक्टर कुमुद लता जी की प्रेरणा से पारसनाथ भगवान जाप का अनुष्ठान हुआ उप प्रवर्तनी महासती सत्य साधना जी चारू प्रज्ञा जी ने सभा को संबोधित किया।