श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन
रतलाम 28 सितंबर। सम्यक दृष्टि का बहुत महत्व है। सम्यक दृष्टि के अभाव में शास्त्र भी शस्त्र बन जाता है और सम्यक् दृष्टि हो तो शस्त्र भी शास्त्र बन जाते हैं। सम्यक् दृष्टि होगी, तो जीवन में जो भी ज्ञान पढ़ेंगे, वह आत्मा के लिए हितकारी होगा।
यह बात मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कही। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवर्तकश्री ने कहा कि संसार में सम्यक दृष्टि के लिए लोग जागते हैं, उनमें थोड़ी श्रद्धा भी जागती है, लेकिन फिर भी वे सुधरते नहीं है। पहले पढाई में बच्चे के 33 प्रतिशत नंबर आते तो भी माँ-बाप खुश हो जाते थे कि चलो बेटा पास हो गया। लेकिन अब 98-99 प्रतिशत नंबर आने पर भी कहते है कि 100 प्रतिशत क्यों नहीं लाए ? इससे बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं और आत्महत्या तक कर लेते हैं।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि तीर्थंकर भगवंतों ने जो ज्ञान दिया है, वह उनकी आत्मा का ज्ञान है। बाहर का नहीं है। इसका अनुसरण करना चाहिए। वीतराग का ज्ञान पढ़ने के बाद भी उसका फल जीवन में नहीं आए, तो जीवन निरर्थक है। उन्होंने कहा कि प्रभावना नहीं करने से कर्म बंधते है। ज्ञानी को ज्ञान से, तपस्वी को तप से और धनी को धन से प्रभावना करनी चाहिए। प्रभावना लेना भी धर्म है और प्रभावना में सहयोग देना भी धर्म है। इसलिए प्रभावना का सदैव सम्मान करना चाहिए।
धर्मसभा को प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने भी संबोधित किया। संचालन आयुष गंग ने किया। इस दौरान सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा, महासती श्री कल्पनाजी मसा मंचासीन रहे। धर्मसभा में श्री धर्मदास जैन श्री संघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।
मेघनगर श्री संघ ने की विनती
श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा से क्षमायाचना करने प्रतिदिन देश-प्रदेश के कई स्थानों के धर्मानुरागी आ रहे है। प्रवचन के दौरान पूना, चिंचवड, पिपलगांव वसंत, नासिक, उज्जैन, इंदौर एवं मेघनगर आदि स्थानों से श्री संघ सदस्य दर्शन-वंदन करने पहुंचे। मेघनगर से श्री संघ अध्यक्ष रवि सुराणा, वरिष्ठ सुश्रावक पंकल वागरेचा, यशवंत बाफना के नैतृत्व आएं श्री संघ की और से विपुल धोका ने प्रवर्तकश्री से वर्षावास पश्चात मेघनगर आने की पुरजोर विनती की। धर्मसभा का संचालन श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने किया।