

रतलाम, 21 मार्च। मानव भव मिला है तो परमात्मा की भक्ति करते रहे। परमात्मा से कुछ मांगना है तो भक्ति मांगे। भक्ति से मन की प्रसन्नता मिलती है। प्रभु ने जो छोड़ा है वह मांगना याचना है और जो पाया है उसे मांगना प्रार्थना है। यदि प्रभु से हमें कुछ मांगना ही है तो सद्बुद्धि मांगना चाहिए। यह बात आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. ने “माय थ्री प्रेयर्स” विषय पर प्रवचन के दौरान कही।
आचार्य श्री ने कहा कि प्रभु से प्रार्थना करो तो तीन चीज- सद्बुद्धि, समधी और गति मांगना चाहिए। सद्बुद्धि और समाधि तो हमें कैसे भी मिल जाएगी लेकिन गति चाहिए तो वह सिर्फ परमात्मा से मिलेगी और गति मिल गई तो आपका मानव भाव सफल हो जाएगा। हमारे पास बुद्धि तो बहुत है, हमें उसकी डिमांड नहीं करना है, हमें प्रभु से सिर्फ सद्बुद्धि की डिमांड करना है।
आचार्य श्री ने कहा कि जिस शब्द के आगे ” सद् ” लग जाता है उसका अर्थ ही बदल जाता है। सुख, शरीर व मन का होता है लेकिन चित्त आत्मा का होता है। चित्त हमेशा प्रसन्न रहना चाहिए। हमें खाने के लिए बुद्धि चाहिए लेकिन क्या खाना है उसके लिए सद्बुद्धि ही चाहिए। बुद्धि सुख की चिंता कराती है जबकि सद्बुद्धि से स्वयं के सुख के साथ सबकी चिंता होती है।
शुक्रवार को “मृत्यु से मुलाकात” विषय पर होंगे प्रवचन
आचार्य श्री निश्रा में शुक्रवार को मोहन टॉकीज में “मृत्यु से मुलाकात” विषय पर प्रवचन होंगे। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ, गुजराती उपाश्रय श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वे. पेढी, रतलाम द्वारा आयोजित प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थिति रहे।