प्रेम सद्भावना और करुणा का संचार प्राणी मात्रा में हो यही धर्म का मुख्य लक्ष्य है – संत कमल मुनि जी कमलेश

अहमदनगर आनंद धाम 23 मार्च 2024 । आध्यात्मिक ज्ञान की शिक्षा विज्ञान के माध्यम से जनता में प्रस्तुत किया जाए तो सर्वमान्य और आस्था युक्त होगा। उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने आचार्य सम्राट आनंद ऋषि जी के अष्टदिवसीय समारोह पर विशाल सभा को संबोधित करते कहा कि ग्रंथ की शिक्षा विज्ञान की कसौटी पर शत प्रतिशत खरी उतर रही है ।
मुनि कमलेश से बताया कि सभी धर्म की मान्यताएं अलग-अलग होने से धर्म की अच्छाइयों को स्वीकार नहीं करेंगे और अपनी बुराई का त्याग भी नहीं करेंगे परंतु विज्ञान के सत्य को सब स्वीकार करेंगे । उन्होंने बताया कि अध्यात्म और विज्ञान एक सिक्के के दो पहलू है विज्ञान पर अध्यात्म का अंकुश रहेगा तो वरदान बनेगा और आध्यात्म के सहारे विज्ञान अपने शोध में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
राष्ट्र संत ने कहा कि पर्यावरण, नशा मुक्ति, शाकाहार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिसर्च रिपोर्ट पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए तो युवा पीढ़ी बुराई से बच जाएगी। प्रेम सद्भावना और करुणा का संचार प्राणी मात्रा में हो यही धर्म का मुख्य लक्ष्य है ।
महासती अर्चना जी मीरा ने कहा कि जितना विज्ञान का आविष्कार हुआ है बाहरी दूरी कम हुई है विकास हुआ है वहीं पर दिलों की दूरियां बड़ी है मानव मैं विचारों की समृद्धि का अभाव हो रहा है उसकी पूर्ति आध्यात्मिक से होगी।
तत्व चिंतक वरिष्ठ संत श्री आदर्श ऋषि जी ने कहा कि मर्यादा में वस्तु का उपयोग हो तो वरदान बनेगी और मर्यादा से बाहर गए तो विनाश का काम करेगी । वस्तु को अच्छी अथवा बुरी कहना अज्ञानता है उपयोग करने वाले के ऊपर निर्भर है।
महाराष्ट्र प्रवर्तक श्री कुंदन ऋषि जी ने राष्ट्र संत कमल मुनि जी के आगमन पर आत्मीय अभिनंदन करते कहा कि कर्मठ निरंतर नया करने वाले होनहार संत है । सभी धर्म को साथ में लेकर शासन प्रशासन के माध्यम से जो धर्म के प्रभाव में कर रहे हैं वह सबके वश की बात नहीं है । गौ सेवा व्यसन मुक्ति वीरांगना जैसे कार्यों से समाज को नई दिशा मिली है। 28 मार्च की समारोह हेतु करीब 50 और 60 साधु साध्वी पधार गए हैं। अष्टद दिवसीय अखंड महामंत्र का जाप चालू है । प्रतिदिन प्रवचन वाला और सेवा के कार्य हो रहेहैं।