आचार्य श्री विजय कुलबोधिसूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में आगमोद्धारक भवन में किया गुणानुवाद


रतलाम, 31 मार्च। भीष्मतपस्वी मुनिराज श्री मणिप्रभ विजयजी म.सा. की 42 वीं पुण्यतिथि निमित्त रविवार को आचार्य श्री विजय कुलबोधिसूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में आगमोद्धारक भवन, सेठजी का बाजार में भव्य गुणानुवाद सभा हुई। गुणानुवाद सभा के साथ पुणिया श्रावक ग्रुप के सामायिक भी हुए। इसके पश्चात विशिष्ट संघ पूजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में धर्मालुजनों ने भाग लिया।
आचार्य श्री ने इस मौके पर कहा कि गर्मी के इस मौसम में हम 5 मिनट पंखे, कूलर और ऐसी के बिना नहीं रह सकते है और गुरु भगवंत संयम जीवन में रात को संयम के साथ आराम से सो जाते है। मुनिराज श्री मणिप्रभ विजयजी म.सा. की तीन विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमें आलोचनाओं से बचकर अपने धर्म के प्रति सजग रहना चाहिए और सदैव धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। मुनिराज के जीवन में किसी भी चीज का परिगृह नहीं था। उन्होंने जिंदगी भर तप और त्याग किया। इतना अद्भुत जीवन हमें भी मिले ऐसी चाहत हम भी रखें।
आचार्य श्री ने कहा कि मुनिराज के परिवार में प्रथम दीक्षा हुई और उसके बाद परिवार के 16 सदस्यों ने दीक्षा ली। उन्होंने परिवार के किसी सदस्य को यह नहीं कहा कि दीक्षा लेकर शिष्य बन, साधु बन। उनके प्रभाव से अपने आप सभी के जीवन में परिवर्तन आया और एक के बाद एक सभी को दीक्षा का भाव हुआ और दीक्षा ली। हमारे जीवन में भी उनके जैसी ममता और नम्रता आए, यहीं भाव होना चाहिए। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वे. पेढी, रतलाम द्वारा आयोजित धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाए उपस्थित रहे।