मोह का आभाव ही मोक्ष है – तपस्वी रत्न अभयमुनि जी म. सा.

जावरा (अभय सुराणा) । अहंकार दुख है पीड़ा है अहंकार एवं अभिमान अगर मनुष्य जीवन से निकल जाए तो वह जीते जी मोक्ष का आनंद ले सकता हैं अहंकार अभिमान को त्यागे बिना मोक्ष की मंजिल को पाना असंभव है अहंकार अनंत परमात्मा से मिलने नहीं देगा क्षमा सहनशीलता का गुण जिस व्यक्ति में विद्यमान होता है उस व्यक्ति के भाव एवं विचार शुद्ध होते हैं वह धार्मिक क्रियाओ में संलग्न रहते हुए अपनी आत्मा का कल्याण कर सकता है जैन धर्म भावना प्रधान धर्म है धर्म की इमारत भावो की बुनियाद पर खड़ी होती है राग, देष, रूपी से मनुष्य अपने कल्याण की अपेक्षा दूसरों का अहित एवं अशुभ की ज्यादा चिंता करता है और इस प्रकार अपने लिए भावी दुखों को आमंत्रित करता है उक्त उद्गार रविवार को श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर चौपाटी पर जिन शासन गौरव आध्यात्म योगी उमेश मुनि जी महाराज साहब के सुशिष्य तपस्वी रत्न श्री अभय मुनि जी म. सा. ने एक महती धर्म सभा में व्यक्त किये उन्होंने कहा कि मानव जीवन का चरम लक्ष्य मोक्ष है मोह का आभाव ही मोक्ष है और उसके लिए आवश्यक है पवित्र ह्रदय जब तक जीवन में पवित्रता नहीं आती जब तक आत्मा में धर्म का”हो ही नहीं सकता धर्म सभा को पवन मुनि जी म. सा. ने संबोधित करते हुए मानव जीवन में सामायीक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सम भावों में रमण करते हुए सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की बात कही आज की प्रभावना श्री राजमल चंदनमल खारीवाल ,श्रीमती मोहन बाई बाबूलाल ओस्तवाल, श्री विजय कुमार वीरेंद्र कुमार पामेचा, श्रीमती चंद्रकांता बाई चपलोद ,श्री सुनील छाजेड़ परिवार द्वारा वितरित की गई आज की धर्म सभा में श्री कांतिलाल खारीवाल, राजमल खारीवाल ,अनिल पोखरना, राकेश मेहता, ललित भंडारी ,समरथमल औसतवाल, सुशील चपलोद,प्रदीप लुक्कड, पारस औरा, विनोद ओस्तवाल, सुरेश ओस्तवाल, कनकमल चौरडिया, सुभाष चौरडिया, धर्मेश खारीवाल, आनंद रांका, मनोज मेहता, राकेश ओस्तवाल, विजय पामेचा उपस्थित थे। धर्म सभा का संचालन श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के पूर्व महामंत्री सुभाष टुकड़िया ने किया।