लोकतंत्र और देश के भविष्य के लिए करें अधिकाधिक मतदान

शिक्षक मंच ने परिचर्चा का आयोजन कर मतदान के लिए शपथ ग्रहण की

रतलाम । मतदान भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था का संवैधानिक महापर्व है जिसमें प्रत्येक भारतीय अपने विवेक और स्वतंत्र वैचारिक अधिकार का उपयोग कर इस महापर्व का आनंद पूरे उत्साह और जोश के साथ मना कर जिम्मेदार और जागरूक नागरिक होने का परिचय प्रदान करें । यही लोकतंत्र की विशेषता है यही लोकतंत्र का मंगल उत्सव भी है । मतदान में आने वाली गिरावट हमारी वैचारिक निर्धनता को प्रकट कर रहा है जो अत्यंत चिंतनीय और देश हित में कतई नहीं है । इसके लिए प्रबुद्ध वर्ग शिक्षक वर्ग को आगे आकर बीड़ा उठाने होगा।
उपरोक्त विचार आगामी लोकसभा चुनाव में मतदान शत प्रतिशत करवाने के लिए आम नागरिक के क्या प्रयास होना चाहिए विषय पर आयोजित परिचर्चा में विभिन्न वक्ताओं ने विचार व्यक्त किये ।
रोटरी गार्डन कस्तूरबा नगर में आयोजित उक्त परिचर्चा का शुभारंभ करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनी वाला ने कहा कि शायद दुनिया के हम पहले देशवासी हैं जहां मतदान करने के लिए लोगो को प्रेरित करना पड़ता है । यह चिंता का विषय है और यह भी चिंतनीय है कि दिन प्रतिदिन चुनाव में मतदान का प्रतिशत घटता जा रहा है जो मतदान के प्रति उदासीनता को दर्शाता है इसके लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे । प्रबुद्ध वर्ग को आगे आना होगा लोगों में जागरूकता लाना होगी तभी इसके सुखद परिणाम आएंगे ।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुभाष कुमावत ने कहा कि वोट देने की ताकत आम भारतीय को समझना होगी उसके वोट में कितना दम होता है यह शायद अभी तक उसे आत्मज्ञान नहीं हुआ है तभी मतदान के प्रति अरुचि बनी हुई है । पिछले दो दशकों में जरूर थोड़ा सुधार हुआ है लेकिन पर्याप्त नहीं कहा जा सकता । अभी भी लोगों में मतदान के प्रति आवश्यक जागरूकता का अभाव है। यही कारण है कि इतनी कोशिश करने के बावजूद 60-65 प्रतिशत के करीब ही मतदान हो पाया है ।
पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. सुलोचना शर्मा ने कहा कि मतदान के प्रति पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक जागरूकता बनी हुई है और यह ग्रामीण क्षेत्र में तो और भी अधिक पाई जाती है जो हमारे लोकतंत्र के लिए अत्यंत उत्साह जनक बात कही जा सकती है । लेकिन अभी भी यह स्थिति आत्म गौरव करने लायक नहीं है । मतदान के प्रति लोगों में  प्रेरणा का अभाव है सरकार के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं को भी आगे आकर इस जन आंदोलन का रूप देना चाहिए ।
संस्था अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय कर्तव्य के प्रति हमेशा प्रत्येक नागरिक को सजग रहना चाहिए । मतदान एक ऐसा माध्यम है जो देश के लोगों का भविष्य निर्धारण करता है उनकी खुशियां या दुखों का कारण बन सकता है । खुशहाल समाज और खुशहाल देश के लिए अधिक से अधिक मतदान हो इसके लिए जन जागरण की जरूरत है ।
पूर्व प्राचार्य गोपाल जोशी ने कहा कि मतदान में आ रही गिरावट का मूल कारण अशिक्षा है इसके प्रति सरकार का रवैया आज भी उदासीन है । प्रयोगात्मक शिक्षा के कारण राष्ट्रीय मुद्दों और दायित्वों का प्रचार-प्रसार नहीं हो पाता है जो अत्यंत आवश्यक है, आने वाली पीढ़ी को इसके लिए सचेत करना होगा ।
लायंस क्लब की पूर्व रीजन चेयर पर्सन वीणा  छाजेड़ ने कहा कि मतदान लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न अंग है जिसके बिना हम सुखद समाज की कल्पना नहीं कर सकते । हमारे भविष्य निर्धारण का मतदान सर्वोत्तम मार्ग है जिसके माध्यम से समाज और देश में स्थायित्व और मजबूती प्रदान होती है ।
कार्यक्रम संयोजिका पूर्व शिक्षिका भारती उपाध्याय ने कहा कि मतदान के लिए परिवार के मुखिया को जिम्मेदार मानना चाहिए । सरकार से मिलने वाली सारी सुविधाएं परिवार ग्रहण करता है इसलिए मतदान की जिम्मेदारी भी उसकी अपनी होती है जो देश के लिए अति आवश्यक है ।
बी.के.जोशी ने कहा कि हम मतदान को बढ़ाने के लिए चाहे जितने प्रयास करें लेकिन वोट डालने की अनिवार्यता जब तक नहीं होगी तब तक लोग इसके लिए आगे नहीं आएंगे । पूर्व उपाध्यक्ष तथा शिक्षक कांग्रेस के जिला सचिव नरेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि मतदान के दिन अवकाश रहता है लेकिन फिर भी लोग घर में बैठकर टीवी और अन्य मनोरंजन उत्सव में व्यस्त रहते हैं लेकिन देश के प्रति अपनी सरकार के प्रति उनमें राष्ट्रीय चेतना का भाव कम दिखाई देता है, कम मतदान होना हमारी राष्ट्रीय उदासीनता का परिचायक है ।
पूर्व अध्यक्ष कृष्ण चंद्र ठाकुर ने कहा कि हमारी युवा पीढ़ी मतदान के प्रति अधिक उदासीन दिखाई देती है यह चिंता का विषय है । समृद्ध और शिक्षित लोग मतदान न करने में अपनी शान समझते हैं यह सामाजिक विकार है या अत्यंत चिंतनीय है । जन प्रशिक्षण संस्थान की संयोजक श्रीमती कल्पना राजपुरोहित ने कहा कि अधिक मतदान बढ़ाने के लिए  चुनाव के वक्त होने वाले प्रयास ना काफी है इसके लिए प्रत्येक माह संगोष्ठी हो, कार्यशाला हो और लोगों को मतदान के प्रति 5 वर्षों तक जागरूक रखना चाहिए । साहित्यकार कवि श्याम सुंदर भाटी ने कहा कि मतदान उत्सव के रूप में स्थापित हो इसके लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे । सामाजिक जन चेतना आवश्यक है तभी इसके अच्छे परिणाम आ सकते हैं वरना यह बहस और चिंता सिर्फ चुनाव तक ही सीमित रहेगी ।
रमेश उपाध्याय ने कहा कि देश के प्रति अपना दायित्व निभाते हुए मतदान के प्रति प्रत्येक भारतीय को सजग रहना चाहिए मतदान ही हमारे देश में ईमानदार सरकार को स्थापित करने में भूमिका निभा सकता है वरना फिर 5 वर्षों तक प्रायश्चित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता है । आरती त्रिवेदी ने कहा कि मतदान में महिलाओं को अपनी जवाबदारी समझते हुए पूरे परिवार के साथ मतदान का हिस्सा होना चाहिए तभी महिला मतदान का प्रतिशत बढ़ेगा।  देवेंद्र वाघेला ने कहा मतदान की महत्ता प्रत्येक भारतीय को समझना होगी तभी इसके सार्थक परिणाम आएंगे । विधान परिषद बढ़ाने में बुद्धिजीवी और शिक्षित वर्ग को अधिक पहल करना होगी । परिचर्चा में कई सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।