- त्रिशला चली संसार सागर से तिरने के लिए
- 9 जून को राजस्थान के बेंगू नगर में होगी दीक्षा


रतलाम। आज की इस भौतिकता की चकाचौंध में जैन भगवती दीक्षा अंगीकार करना कोई साधारण पुरुषार्थ नहीं है। जो वीर होता है वास्तव में वही संयम पथ पर आरूढ़ होता है। भैातिक सुख, सुविधाओं, साधनों का त्याग एवं अपरिग्रह से साधुत्व की गरिमा को पाना साधुत्व है। आत्म कल्याण के लिए संसार को असार समझते हुए चकाचौंध भरे इस सांसारिक जीवन का त्याग करने के लिए दृढ़ संकल्प लेता है, वही संयम जीवन अंगीकार कर सकता है। रत्नपुरी रतलाम शहर के इतिहास पर नजर डाले तो पूर्व में भी कई आत्माओं ने संयम की ओर प्रस्थान किया है। इसी कड़ी में रतलाम से एक और मुमुक्षु का नाम जुड़ जाएगा। इसी के अंतर्गत व्यसन मुक्ति प्रणेता आचार्यश्री रामलालजी “रामेेश” के मुखारविंद से रतलाम शहर की युवा मुमुक्षु त्रिशला धम्माणी की 9 जून को राजस्थान के बेंगू नगर में दीक्षा होगी। इनके साथ छत्तीसगढ़ के दुर्ग से मुमुक्षु सौरभ संचेती, दुर्ग परसोदा से मुमुक्षु प्रणिता बाफना, दुर्ग अर्जुन्दा से मुमुक्षु शैली बाफना एवं राजस्थान के देशनोक से मुमुक्षु सौरभ भूरा भी दीक्षा अंगीकार करेंगे। इस तरह बेंगू में पांच दीक्षाएं होगी। दीक्षा के पूर्व मुमुक्षु का जगह-जगह बहुमान समारोह आयोजित हो रहा है।
देशभर में दीक्षाओं का ठाठ लगा हुआ है
दीक्षाओं पर एक नजर डाले तो समूचे देशभर में हर संप्रदाय में दीक्षाओं का मानो ठाठ लगा हुआ है। अखिल भारत वर्षीय साधुमार्गीय जैन संघ के इतिहास के पन्नों पर प्रकाश डाले तो आचार्य श्री नानेश की कृपा से आचार्य श्री रामलालजी “रामेश” की नेश्राय में वर्तमान में 472 चारित्र आत्माएं जिनशासन की भव्य प्रभावना कर रही है, इनमें आचार्य श्री रामेश के मुखारविंद से अब तक 332 मुमुक्षु आत्माएं जैन भगवती दीक्षा अंगीकार संयम पथ पर आरूढ़ हुई है। जो अनुमोदनीय है।
मुमुक्षु को निम्न ज्ञान कंठस्थ है
12 वीं तक शिक्षित रतलाम की मुमुक्षु त्रिशला धम्माणी ने संयमी आत्माओं के साथ लगभग 350 से भी अधिक कि.मी. का पैदल विहार किया है। दो वर्ष से वैराग्य जीवन व्यतीत कर रही मुमुक्षु बहना ने चारित्र आत्माओं के सानिध्य में रहकर कई धार्मिक ज्ञानार्जन किया है। इसके अंतर्गत पुच्छिंसुणम, दशवैकालिक 1 से 4 अध्ययन, जैन सिद्धांत 32, लघु दंडक, गति आगति, अष्ट प्रवचन माता, 67 बोल एवं अन्य थोकड़े का ज्ञानार्जन कर कंठस्थ किए। इनके अलावा जैन सिद्धांत भूषण की धार्मिक परीक्षाओं में भाग लेकर भी उत्कृष्ट अंक अर्जित करते हुए ज्ञानार्जन में अभिवृद्धि की है।
दीक्षार्थी त्रिशला धम्माणी का किया बहुमान
बहुमान की श्रृंखला में रतलाम शहर की अमलतास कॉलोनी में ढाबरिया परिवार की ओर से दीक्षार्थी त्रिशला धम्माणी का बहुमान समारोह आयोजित किया गया। समारोह को लेकर ढाबरिया परिवार में जबरदस्त उत्साह देखा गया। समारोह का प्रारंभ नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप एवं गुरु गुणगान से हुआ। पश्चात समारोह की प्रारंभिक श्रृंखला में युवा मुमुक्षु त्रिशला धम्माणी का ढाबरिया परिवार की ओर से अशोक-मधु ढाबरिया एवं अमित-सोनू ढाबरिया तथा आरुषि व विवान ने शॉल ओढ़ाकर, माला पहनाकर चांदी का सिक्का व श्रीफल भेंटकर बहुमान किया। मुमुक्षु का बहुमान कर ढाबरिया परिवार अभिभूत हो गया।
89 वर्षीय पड़दादी व धम्माणी परिवार का किया बहुमान
इस अवसर पर मुमुक्षु के वीर दादाजी-दादीजी सुभाष-अनिता धम्माणी, वीर माता-पिता डिंपल-अनूप धम्माणी, वीर अंकल-आंटी अतुल-नीलम धम्माणी, वीर भाई आदी, अरिष्ठ एवं बहना ईरा धम्माणी का भी ढाबरिया परिवार ने शॉल माला से बहुमान किया। वहीं झमुबाई चंपालाल दरड़ा परिवार बखतगढ़ वाले ने भी मुमुक्षु त्रिशला बहना का बहुमान कर खूब खूब अनुमोदना करते हुए मुमुक्षु एवं परिवारजन को साधुवाद दिया। इधर अशोक-मधु ढाबरिया ने मुमुक्षु के निवास पर पहुंचकर मुमुक्षु की 89 वर्षीय वीर पड़दादी कोमलबाई बसंतीलाल धम्माणी का शॉल, माला से बहुमान कर श्रीफल भेंट किया। इस दौरान का क्षण अत्यंत ही भावुक क्षण हो गया था।