अखंड ज्ञान आश्रम में भागवत कथा का पांचवा दिन – गोवर्धन पूजन कर लगाया छप्पन भोग

रतलाम 23 मई । अखंड ज्ञान आश्रम पर श्री स्वामी ज्ञानानंद जी की 33वीं पुण्य स्मृति महोत्सव के तहत संगीतमय भागवत कथा हो रही है। था की यजमान श्यामलाल सौं शांति देवी एवं सुरेश पापटवाल परिवार रतलाम द्वारा पंडित नरेंद्र शर्मा दंतोडिया वाले द्वारा करवाई जा रही है। आज गुरुवार को श्रीमद् भागवत कथा के प्रारंभ में पोथी पूजन का सौभाग्य श्री शुभम् निकिता पापटवाल द्वारा किया गया। व्यास पीठ से भागवत कथा के पांचवें दिन बताया कि गोवर्धन की पूजा माने प्रकृति की पूजा। हमे चाहिए कि हम पंचमहाभूतों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश की पूजा करो। इन्हें प्रदूषित मत करो। पर्यावरण की रक्षा करने की तो बात करते हैं लेकिन नदियों में गंदी नालियों और नालों का पानी छोड़ते हैं।
गंगा, जमुना, सरस्वती को माता कहा गया है। इनमें स्नान-पान बड़ा महत्वपूर्ण है, मगर आज हमने अपने निजी स्वार्थ के चलते इनकी क्या हालत कर दी है।हमारे दिल-दिमाग में प्रदूषण हो गया है, श्री कृष्ण के कहने पर ब्रजवासियों ने पर्यावरण के देवता श्री गोवर्धन जी को सम्मानित कर उत्सव प्रारंभ किया।
बाल लीला
माखन चुराकर कृष्ण यही समझा रहे हैं कि संसार में परम सार तत्त्व अर्थात ईश्वर का वरण करो, सारहीन माया का नहीं।बाल-लीलाओं की इस श्रृंखला में विषधर कालिया का मर्दन हमारे विषाक्त मन का प्रतीक है। उसके सहस्रों विषैले फन हमारे अंतस् में फुफकारते अगणित विकारों, दुर्भावनाओं के द्योतक हैं। हमारे जीवन की यमुना भी इन वासनात्मक प्रवृत्तियों के कारण विषाक्त हो गई है। जीवन की मिठास लुप्त और शांति भंग होती जा रही है।
श्री कृष्ण का यमुना के तल में उतरना प्रतीक है हमारे जीवन में एक पूर्ण गुरु के पदार्पण का। गुरु प्रदत्त ब्रह्म ज्ञान द्वारा अंतस् में व्याप्त विकार क्षीण होने लगते है। मन नथ जाता है।
गावो विश्वस्य मातरः !!
गाय में भगवान का निवास होता है
देश को विश्व गुरु बनाना हे हिंदू राष्ट्र बनाना हे तो गाय की पूजा हो ।इस भारत देश के अंदर प्रातः स्मरणीय गौ माता जिसके अंदर 33 कोटि देवता निवास करते हैं उसका कत्लेआम इस भारत भूमि के ऊपर गोपाल की भूमि के ऊपर नहीं होना चाहिए इस देश के अंदर समस्याएं अनेक है लेकिन अगर कोई समाधान पूछे उसका समाधान है गाय की सेवा और गो संवर्धन इसीलिए तो भगवान श्री कृष्ण ने गायों की सेवा करने के लिए राम से कृष्ण बनकर के आए हैं तीनों लोकों के कष्ट हरने वाले श्री कृष्ण के अनिष्ट हरण का काम गाय करती है।
जब-जब श्रीकृष्ण पर कोई संकट आया; नंदबाबा और यशोदा माता ब्राह्मणों को स्वर्ण, वस्त्र व पुष्पमाला से सजी गायों का दान करते थे।
भगवान श्रीकृष्ण ने ही ‘गोधन की सौं’ शपथ प्रचलित कराई। वंशी की ध्वनि से प्रत्येक गाय को नाम ले-लेकर पुकारते थे और वंशी की टेर सुनकर चाहे वे गायें कितनी भी दूर क्यों न हों, दौड़कर उनके पास पहुंच जातीं और चारों ओर से उन्हें घेरकर खड़ी हो जाती हैं।
गोविन्द गिरि चढ़ गाय बुलावत।
गायँ बुलाईं धूमर-धौरी टेरत वेणु बजाय।।
भगवान श्री कृष्ण की समस्त लीलाएं दिव्य एवं पारलौकिक हैं। उनका चरित्र अत्यंत उदात्त है। वे शुद्ध-बुद्ध-मुक्त-चैतन्य रूप हैं।उनको एवं उनकी लीलाओं में निहित गूढ़ार्थों को लौकिक बुद्धि द्वारा नहीं समझा जा सकता। ब्रह्मज्ञान ही उनको समझने की एक मात्र कुंजी है।
एक ब्रह्मज्ञानी वेदांती ही अन्तर्हृदय की गहराइयों में उतरकर इन लीलाओं के मर्म को समझ सकता है। मधुर गायन के साथ भक्ति करते हुए झूमे भक्तगण। मधुर संगीत के साथ भक्ति का अमृत पान करते हुए कई भजन गाये गये जैसे नाचें नंदलाल नचावे वा की मईया , दर्शन करा दे मय्या तेरे नंदलाल का ‘ सुमधुर भजनों से पूरा पंडाल महिलाओं ने एवं पुरुषों से झूम उठा।
आज पोथी पूजन में मुख्य अतिथि भाजपा जिला अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय ,पूर्व महापौर शैलेंद्र डागा , पूर्व जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह लुनेरा , अश्विन जायसवाल ,मांगीलाल जैन, मोहन मुरली वाला,तेली समाज गोपाल राठौड, महेंद्र चौहान ,बंसीलाल राठौड ,सुरेश राठौड़ ,भगत राठौड़ ,राजपूत समाज के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गोयल, किशोर सिंह चौहान, मनोहर सिंह चौहान, मयंक सिंह राठौर, शैलेंद्र सिंह देवड़ा ,भारत सिंह सोलंकी , विजय सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह सोलंकी ने व्यास पीठ का पूजन किया।
पांचवें दिन की आरती में हीरालाल मंजू देवी,सुरेश अलका पापटवाल, जीवन संध्या,विनोद, राकेश, पार्षद योगेश, कन्हैया लाल मौर्य, पूर्व महापौर आशा मौर्य, शुभम् निकिता, सुरेश शिवकन्या गढ़वाल, गोपाल उषा सांखला, अशोक शकुंतला अजमेरा, पापटवाल संदेश , नंदेश , अश्विनी शिवांग निशिता पापटवाल परिवार ने संपन्न कर प्रसादी का वितरण किया गया तथा कल शुक्रवार को महारास एवं द्वारकाधीश रुक्मणी विवाह उत्सव संपन्न किया जाएगा । उक्त जानकारी सुरेश पापटवाल ने दी।