अखंड ज्ञान आश्रम में श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर भगवान के अन्य विवाह राजसुय यज्ञ, सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष संपन्न

रतलाम 25 मई । आज शनिवार को सैलाना रोड स्थित अखंड ज्ञान आश्रम पर श्री स्वामी ज्ञानानंद जी की 33 वीं पुण्य स्मृति महोत्सव के तहत संगीतमय भागवत कथा हुई। कथा के यजमान श्यामलाल- सौं.शांति देवी एवं सुरेश पापटवाल परिवार रतलाम द्वारा पंडित नरेंद्र शर्मा दंतोडिया वाले द्वारा करवाई गई। श्रीमद् भागवत कथा के प्रारंभ में पोथी पूजन का सौभाग्य श्री शुभम् निकिता पापटवाल द्वारा किया गया। व्यास पीठ से भागवत कथा में बताया कि भगवान के अन्य विवाह राजसूय यज्ञ, सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष संपन्न हुआ। इसमें बताया कि भगवान श्री कृष्ण-सुदामा की मित्रता बहुत प्रचलित है। सुदामा गरीब ब्राह्मण थे। अपने बच्चों का पेट भर सके उतने भी सुदामा के पास पैसे नहीं थे। सुदामा की पत्नी ने कहा, “हम भले ही भूखे रहें, लेकिन बच्चों का पेट तो भरना चाहिए न ?” इतना बोलते-बोलते उसकी आँखों में आँसू आ गए। सुदामा को बहुत दुःख हुआ। उन्होंने कहा, “क्या कर सकते हैं ? किसी के पास माँगने थोड़े ही जा सकते है।” पत्नी ने सुदामा से कहा, “आप कई बार कृष्ण की बात करते हो। आपकी उनके साथ बहुत मित्रता है ऐसा कहते हो। वे तो द्वारका के राजा हैं। वहाँ क्यों नहीं जाते ? जाइए न ! वहाँ कुछ भी माँगना नहीं पड़ेगा !”
सुदामा को पत्नी की बात सही लगी। सुदामा ने द्वारका जाने का तय किया। पत्नी से कहा, “ठीक है, मैं कृष्ण के पास जाऊँगा। लेकिन उसके बच्चों के लिए क्या लेकर जाऊँ ?”सुदामा की पत्नी पड़ोस में से चावल ले आई। उसे फटे हुए कपडे में बांधकर उसकी पोटली बनाई। सुदामा उस पोटली को लेकर द्वारका जाने के लिए निकल पड़े।
द्वारका देखकर सुदामा तो दंग रह गए। पूरी नगरी सोने की थी। लोग बहुत सुखी थे। सुदामा पूछते-पूछते कृष्ण के महल तक पहुँचे। दरवान ने साधू जैसे लगने वाले सुदामा से पूछा, “एय, यहाँ क्या काम है ?”
सुदामा ने जवाब दिया, “मुझे कृष्ण से मिलना है। वह मेरा मित्र है। अंदर जाकर कहिए कि सुदामा आपसे मिलने आया है।” दरवान को सुदामा के वस्त्र देखकर हँसी आई। उसने जाकर कृष्ण को बताया। सुदामा का नाम सुनते ही कृष्ण खड़े हो गए ! और सुदामा से मिलने दौड़े । सभी आश्चर्य से देख रहे थे ! कहाँ राजा और कहाँ ये गरीब ब्राह्मण ?
कृष्ण सुदामा को महल में ले गए। सांदीपनि ऋषि के गुरुकुल के दिनों की यादें ताज़ा की। सुदामा कृष्ण की समृद्धि देखकर शर्मा गए। सुदामा चावल की पोटली छुपाने लगे, लेकिन कृष्ण ने खिंच ली। कृष्ण ने उसमें से चावल निकाले। और खाते हुए बोले, “ऐसा अमृत जैसा स्वाद मुझे और किसी में नहीं मिला।”
बाद में दोनों खाना खाने बैठे। सोने की थाली में अच्छा भोजन परोसा गया। सुदामा का दिल भर आया। उन्हें याद आया कि घर पर बच्चों को पूरा पेट भर खाना भी नहीं मिलता है। सुदामा वहाँ दो दिन रहे। वे कृष्ण के पास कुछ मांग नहीं सके। तीसरे दिन वापस घर जाने के लिए निकले। कृष्ण सुदामा के गले लगे और थोड़ी दूर तक छोड़ने गए।
घर जाते हुए सुदामा को विचार आया, “घर पर पत्नी पूछेगी कि क्या लाए ? तो क्या जवाब दूँगा ?”
सुदामा घर पहुँचे। वहाँ उन्हें अपनी झोपड़ी नज़र ही नहीं आई ! उतने में ही एक सुंदर घर में से उनकी पत्नी बाहर आई। उसने सुंदर कपड़े पहने थे। पत्नी ने सुदामा से कहा, “देखा कृष्ण का प्रताप ! हमारी गरीबी चली गई कृष्ण ने हमारे सारे दुःख दूर कर दिए।” सुदामा को कृष्ण का प्रेम याद आया। उनकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
कृष्ण और सुदामा का प्रेम यानी सच्चा मित्र प्रेम। तो दोस्तों सच्चे प्रेम में ऊँच या नीच नहीं देखी जाती और न ही अमीरी-गरीबी देखी जाती है। इसलिए आज इतने युगों के बाद भी दुनिया कृष्ण और सुदामा की दोस्ती को सच्चे मित्र प्रेम के प्रतीक के रूप में याद करती है।
आज संध्या काल के पोथी पूजन के मुख्य अतिथि पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी, कांग्रेस वरिष्ठ नेता राकेश झालानी, भाजपा पार्षद हितेश कामरेट शर्मा, स्नेहिल उपाध्याय ,गौरव त्रिपाठी ,गोविंद काकानी एवं माली समाज रहे।
आरती में मुख्य रूप से हीरालाल मंजू देवी पापटवाल,सुरेश अलका पापटवाल, जीवन संध्या पापटवाल, पार्षद योगेश पापटवाल,कन्हैया लाल मौर्य, पूर्व महापौर आशा मौर्य, शुभम् निकिता पापटवाल, सुरेश शिवकन्या गढ़वाल, गोपाल उषा सांखला, अशोक शकुंतला अजमेरा,विनोद, राकेश,संदेश ,नंदेश ,अश्विनी शिवांग, निशिता पापटवाल परिवार ने संपन्न कर प्रसादी का वितरण किया गया तथा कल 26 मई रविवार को सुबह 11:00 से 2:00 तक विशाल भंडारा आश्रम ट्रस्ट एवं समस्त भक्त मंडल द्वारा आयोजित किया जा रहा है जिसमें आप सब भक्त गण आमंत्रित है।उक्त जानकारी सुरेश पापटवाल ने दी।