
जावरा (अभय सुराणा)। मध्य प्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश अनुसार शासकीय महाविद्यालय कालूखेड़ा जिला रतलाम में एक दिवसीय वेबीनार व्यक्तित्व विकास व चरित्र निर्माण विषय पर आयोजित किया गया।
“शिक्षा किसी भी राष्ट्र और समाज की रीढ होती है जिसके आधार पर समाज और राष्ट्र का चहुमुखी विकास आकार पाता है। समय के साथ होने वाले शाश्वत परिवर्तन आवश्यकता महसूस करते हैं कि शिक्षा में परिवर्तन लाया जाए। इन्हीं परिवर्तनों के चलते 1986 की शिक्षा नीति में सुधार करने के लिए हमारे देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लायी गई। इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सभी के लिए समावेशी और सामान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की संरचना के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आधारभूत सिद्धांत में एक दृष्टि छुपी है जो पूर्व की सभी शिक्षा नीतियों से स्वयं को विशिष्ट बनाती है।”
साथ ही उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद का कहना था कि “मनुष्य की अंतर निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही शिक्षा है।” उनके द्वारा यह भी उल्लेखित किया गया कि “21वीं सदी की शिक्षा में तकनीकी के साथ हमारा मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को अक्षुण रखना है!”
उनके द्वारा अनेक धार्मिक ग्रंथो का उदाहरण देते हुए व्यक्तित्व और चरित्र शब्द की रोचक ढंग से व्याख्या करते हुए बताया कि मनुष्य का व्यक्तित्व किस प्रकार का होना चाहिए और उसका चरित्र तथा आचरण कैसा होना चाहिए? शिक्षा का लक्ष्य चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास है शिक्षा किसी भी देश की भाषा, सभ्यता, संस्कृति और जीवन आचरण से जुड़ा विषय है! इसका मुख्य अंग चरित्र और संपूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण कर समाज के लिए आदर्श नागरिक तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन परंपरा में व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण स्थान है आज के समय में विद्यार्थियों में सर्वश्रेष्ठ गुण का समावेश होना चाहिए, इन गुणों में संतुलन, उत्तम विचार एवं आत्मविश्वास ऐसे गुण हैं जो चरित्र निर्माण करते हैं।
आगे उनके द्वारा उल्लेख किया गया कि व्यक्तित्व विकास को पंचकोश आधार पर ही पूर्ण माना जाता है जिसमें अन्नमय से पोषण, प्राणमय से बल, मनोमय से विज्ञान और आनंद मय से आध्यात्मिक विकास होता है।
अंत में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने विद्यार्थियों के एक हाथ में ज्ञान और कौशल को रखा है वहीं दूसरे हाथ में चरित्र और आचरण। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य पुराने ज्ञान को आगे बढ़ाने, नए ज्ञान के सृजन के साथ विद्यार्थियों को समसामयिक चुनौती के लिए बौद्धिक तौर पर तैयार करना है। जो वर्तमान में इस शिक्षा नीति के माध्यम से क्रियान्वित हो रहा है। उक्त वक्तव्य मुख्य वक्ता डॉ. चांद किरण सलूजा, निर्देशक संस्कृत प्रमोशन फाऊंडेशन एवं शिक्षाविद नई दिल्ली द्वारा व्यक्त किए गए। द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. कैलाश कडू, पूर्व प्राध्यापक, सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ बिज़नस मैनेजमेंट नागपुर महाराष्ट्र ने अपने उद्बोधन में कहा की किसी भी देश के सांस्कृतिक मूल्य, मानदंड और सामाजिक, सांस्कृतिक परंपराएं व्यक्तित्व के विकास के मुख्य निर्धारक तत्व है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में यदि आप किसी को भी प्रभावित करना चाहते हैं तो आपको बेहतर प्रदर्शन करना होगा इसके लिए आपको किसी को भी आकर्षित करने की कला आनी चाहिए। यह तब ही संभव है जब आपके अंदर श्रेष्ठ गुना का समावेश हो यह श्रेष्ठ गुण है संतुलित एवं सुंदर शरीर उत्तम विचार और आत्मविश्वास।
वेबीनार के आरंभ में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. मिलिंद डांगे एवम आयोजन समिति के संयोजक डॉ. सी एम मेहता ने ज्ञान की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया उसके पश्चात महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का शब्द सुमनों से स्वागत किया गया एवं संपूर्ण वेबीनार के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की।
वेबीनार के मुख्य संरक्षण उच्च शिक्षा विभाग उज्जैन संभाग के अतिरिक्त संचालक डॉक्टर एच एल अनिजवाल ने व्यस्तता के बावजूद वेबीनार की अफलता हेतु हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की।
वेबीनार के संयोजक डॉ. सी एम मेहता ने वेबीनार का सफलतापूर्वक संचालन करते हुए कहा कि देश और दुनिया में हो रहे पर्यावरण नैतिक मूल्यों के हाथ हिंसा हत्याएं महिलाओं का उत्पीड़न आदि समस्याओं का मूल कारण चरित्र का संकट है। शिक्षा के धरातल पर इन्हीं से निपटने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम लागू किए गए हैं देशभर के विशेषज्ञों की सहायता से तैयार किए गए इन पाठ्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य छात्रों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण करना है।
वेबीनार के सफल आयोजन में प्रो. नाजिश शेख, प्रो. चेतन देवड़ा, प्रो. संदीप टांक, प्रो. एच गुप्ता, प्रो. अर्चना पांडे, प्रो. हीरा चौहान, प्रो. हुमा परवीन मंसूरी, डॉ. माया शर्मा, डॉ. चेतना कोठारी, श्री विजय दीक्षित आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वेबीनार के अंत में आभार प्रदर्शन डॉ. एंजेला सिंगारे द्वारा किया गया।