ज्ञानयुक्त वैचारिक क्रांति विचारों को निर्मल आत्मा को पवित्र और शरीर को ऊर्जावान बनाती है – राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश

न्यू बॉम्बे वशी मेवाड़ भवन 14 जून 2024 । ज्ञानयुक्त वैचारिक क्रांति विचारों को निर्मल आत्मा को पवित्र और शरीर को ऊर्जावान बनाती है उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने संबोधित करते कहा कि एक क्रांति पूरे विश्व में सदियों तक अनंत आत्मा को प्रकाश करके सन्मार्ग पर ले आती है।
उन्होंने कहा कि विधवा बहनों की पीड़ा से ने काफी द्रवित हुआ जो सती प्रथा से अनंत गुना ज्यादा खतरनाक निर्दोष बहन को नारकी जीवन जीने को मजबूर करना अक्षम में अपराध है ।
मुनि कमलेश ने बताया कि क्रांति का प्रभाव संपूर्ण मानव समाज में अभूतपूर्व परिवर्तन ला रहा है इतना ही नहीं इसकी गूंज शासन प्रशासन और सरकार में स्पष्ट दिखाई दे रही है।
राष्ट्र संत ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार और प्रशासन को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट 10 निर्देश जारी किए हैं जिसमें पुनर्वासन स्वाभिमान शोषण सुरक्षा स्वास्थ्य एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से उन तक सब सुविधा पहुंचे ।
जैन संत ने कहा कि वीरांगना को विधवा के रूप में सम्मानित करते हुए उन्हें स्वावलंबी उनके लिए आवास गृह कौशल विकास वित्तीय स्वतंत्रता और बैंकिंग कामों को जो सरकार को सुझाव दिया है उनका अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच अभिनंदन करता है । जब तक विधवा शब्द का कलंक खत्म ना होगा उन्हें स्वाभिमान से जीने का अधिकार नहीं मिलेगा तब तक हमारा संघर्ष उनकी सफलता के लिए जारी रहेगा । 15 जून को जैन एकता सम्मेलन 16 जून को गौ रक्षा सम्मेलन 17 जून को अहिंसा दिवस के रूप में न्यू बॉम्बे वाशि मेवाड़ भवन में मनाया जाएगा।

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