कर्म बंधन से छूटना है तो मस्तिष्क को शांत रखना पड़ेगा-साध्वी श्री साध्वी श्री अनंत गुणा श्रीजी मसा.

कल सुबह 9:00 बजे भगवान नेमिनाथ का जन्म कल्याणक मनाएंगे

रतलाम। सौ.वृ.त. श्री राजेंद्र सूरि त्रिस्तुतिक जैन श्वेतांबर श्री संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा नीम वाला उपाश्रय खेरादी वास में रतलाम नंदन प. पू .श्री 1008 जैन मंदिर के प्रेरणादाता, राष्ट्र संत कोकण केसरी गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद् विजय लेखेन्द्र सूरीश्वर जी म.सा. की आज्ञानुवर्ती एवं मालवमणि पूज्य साध्वी जी श्री स्वयं प्रभा श्री जी म.सा. की सुशिष्य रतलाम कुल दीपिका शासन ज्योति साध्वी जी श्री अनंत गुणा श्रीजी म.सा,श्री अक्षयगुणा श्रीजी म.सा. श्री समकित गुणा श्री जी म.सा. श्री भावित गुणा श्री जी म.सा. उपासना में विराजे हैं जिनका चातुर्मास में नित्य प्रवचन चल रहे हैं इसी तारतम्य में आज 8 अगस्त 2024,गुरुवार को साध्वी श्री साध्वी श्री अनंत गुणा श्रीजी मसा. ने अपने मंगल प्रवचन में बताया कि साम्ब प्रद्युम्न चारित्र को समझना है तो उसके बैकग्राउंड को समझाना पड़ेगा।बेर और क्रोध आपको कहां तक ले जाते हैं यह आपको मालूम ही नहीं पड पाता। यह वर और क्रोध कितने ही भव को बिगाड़ देते हैं यह कभी पुत्र बनके कभी पत्नी बन जीवन में आते हैं और जीवन को नष्ट कर देते हैं। अच्छी पत्नी होगी, अच्छा पुत्र होगा तो आपका भाव पर हो जाएगा अन्यथा आगे का भव भी बिगड़ जाएगा। यदि भाव को सुधारना है तो उसको उसी समय मिच्छामी दुखड़ाम दे दो नहीं तो यह क्रोध की चिंगारी भव पार नहीं होने देगी।
कर्म बंधन से छूटना है तो मस्तिष्क को शांत रखना पड़ेगा। शांत मस्तिष्क रखोगे तो कर्म बंधन नहीं बंधेंगे।जब तक बदले की भावना नहीं निकाल देते तब तक कुछ होने वाला नहीं है किसी में 99 गुण है और एक अवगुण है तो अवगुण सबको दिखाते हैं वह 99 गुण नहीं देखते। आप 99 गुणो की ओर ध्यान दो न कि अवगुणों की तरफ। परमात्मा कहते हैं तुम सुपडे जैसे बन जाओ सुपडे को झटकते हैं तो अच्छी चीज अंदर और कचरा बाहर आ जाता है परंतु तुम लोग इसका उल्टा करते हो। यदि सुपडे जैसे बन गए तो अवगुण सब गुरु कृपा से झटक जाएंगे। कर्मों में अपने जैसा बोया है फसल आपको वैसी ही मिलेगी। कर्म किसी की फिजियोलॉजी पर विचार नहीं करते हैं।आपने हंसते हुए कर्म बांध लिए तो रोते क्यों हो?
आज के युग में कर्म फल मोबाइल के द्वारा भी बध जाता है।मोबाइल सबसे पहले झूठ बोलना सीखता है।इसमें आप विभत्स्य दृश्य देखते हो वह चला जाता है पर हम कर्म बांध लेते हो।जैसे पिक्चर देखते हो उसमें हीरो से आपको कोई लेना-देना नहीं है और उसकी भलाई बुराई करने लगते हो इस प्रकार आठ प्रकार के कर्म बंधते हैं भगवान के फोटो मोबाइल में आते हैं उनको अशुद्ध शरीर से या झूठे हाथ से स्पर्श करते हो तो उसका भी दोष लगता है क्या इस तरह से मंदिर में जा सकते हो?… तो आपका जवाब नहीं होगा।इसका इतना उपयोग करो जितनी आपको जरूर जरूर हो। उक्त उक्त विचार प्रवचन में रखें।
साध्वी श्री समकीत गुणा श्री जी मसा. ने प्रवचन में बताया कि आप सिर्फ मेरा मेरा करते हो और उसमे सिर्फ आपका नाम है और आप जो भी करते हो नाम के लिए करते हो परंतु यह एक या दो पीढ़ी तक चलता है और खत्म हो जाता है। कर्म ऐसे करो कि आपका नाम और पीढ़ी इतिहास में अंकित हो जाए।
कल सुबह 9:00 बजे भगवान नेमिनाथ का जन्म कल्याणक मनाएंगे।उसके लिए भगवान नेमिनाथ के चरित्र को और गिरनार को समझना होगा। सौ. वृ.त. त्रीस्तुतिक जैन श्री संघ एवं राज अनंत चातुर्मास समिति, रतलाम के तत्वाधान में बड़ी संख्या में श्रावक एवं श्राविकाए उपस्थित थी।

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