

रतलाम, 8 अगस्त। वर्धमान तपोनिधि पूज्य आचार्य देव श्री नयचंद्रसागर सुरीश्वर जी म.सा. की निश्रा में सैलाना वालों की हवेली मोहन टॉकीज में चातुर्मासिक प्रवचन चल रहे है। इसमें गुरुवार को गणिवर्य डॉ. अजीत चंद्र सागर जी म.सा. ने जीवन में सफल होने के लिए नमो मंत्र को परिभाषित किया। उन्होने कहा कि जब लाभ होता है तो अहंकार होता है। थोड़ी सी चीज मिलने पर हम खुश हो जाते हैं और नहीं मिली तो नाराज होते है। हमारी आत्मा की पात्रता पर सारी चीजें निर्धारित करती है, जो है उसका अहंकार कभी मत करो। नमो, यानी विनय करो, झुक जाओ। जब तक अपनी आत्मा का विकास नहीं होगा तब तक हम विनय भी नहीं हो सकेंगे।
मानव भव मिला है तो अहंकार को झुकाते जाओ और विनय को अपनाते जाओ। विनय का भाव जरूरी है। हमारे जीवन में जब तक विनय नहीं होगा, तब तक कुछ नहीं है। हम संपत्ति से, संबंध से, पदार्थ से भरे हुए हैं। प्रभु से जुड़ने के लिए हमे शून्य होना पड़ेगा। भगवान खाली हाथ होते हैं तब भी उन्हें खुशी मिलती है, उनके आनंद में और वृद्धि होती है। प्रभु की आराधना ध्यान लगाकर और एकाग्रता से करना चाहिए। जीवन में पात्रता का विकास करो, यह प्रभु के महामंत्र से होगा। जब स्वयं से पहले दूसरे को स्थान देने का भाव आ जाए तो समझ लेना विनय आ गया है। हमें अपने मन की सुनना है या भगवान की। अपने मन की सुनेंगे तो नुकसान होगा लेकिन भगवान भी सुनेंगे तो जीवन का कल्याण होगा। श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्री संघ गुजराती उपाश्रय रतलाम एवं श्री ऋषभदेव जी केसरीमल जी जैन श्वेतांबर पेढ़ी रतलाम ने समाजजनो से प्रवचन श्रृंखला में अधिक से अधिक उपस्थित रहकर धर्मलाभ लेने का आव्हान किया।