आयोजन – रविवार प्रातः 7:30 से नवकार की साधना प्रारंभ की जाएगी



रतलाम। सौ.वृ.त. श्री राजेंद्र सूरी त्रिस्तुतिक जैन श्वेतांबर श्री संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा नीम वाला उपाश्रय खेरादी वास में रतलाम नंदन प. पू .श्री 1008 जैन मंदिर के प्रेरणादाता, राष्ट्र संत कोकण केसरी गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद् विजय लेखेन्द्र सुरिश्वर जी म.सा. की आज्ञानुवर्ती एवं मालवमणि पूज्य साध्वी जी श्री स्वयं प्रभा श्री जी म.सा. की सुशिष्य रतलाम कुल दीपिका शासन ज्योति साध्वी जी श्री अनंत गुणा श्रीजी म.सा,श्री अक्षयगुणा श्रीजी म.सा. श्री समकित गुणा श्री जी म.सा. श्री भावित गुणा श्री जी म.सा. उपासना में विराजे हैं जिनका चातुर्मास में नित्य प्रवचन चल रहे हैं व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत आज 10 अगस्त 2024 शनिवार को साध्वी श्री साध्वी श्री अनंत गुणा श्री जी मसा अपने व्याख्यान में कहा कि स्वभाव बदलेगा तो मन बदलेगा और मन बदलेगा तो दशा बदलेगी।मनुष्य स्वयं का भला चाहता है और वह दूसरों का भला नहीं चाहता इस कारण है कि वह दुख भोगता है।इसीलिए मनुष्य को अपना स्वभाव बदलना चाहिए सभी लोगों के लिए अच्छा सोचना चाहिए जब हम सभी लोगों के लिए अच्छा सोचोगे तो खुद के लिए भी अच्छा ही परमात्मा करेगा।इस स्वभाव का परिवर्तन इसको धीरे-धीरे करना पड़ता है स्वभाव तब बदलता है जब आपके मन में खराब विचार आना बंद हो जाए। इसीलिए अपने मन को अच्छा बनाना पड़ेगा मन अच्छा बनेगा तो स्वभाव परिवर्तन होगा।स्वभाव परिवर्तन होने से मनुष्य के जीवन में परिवर्तन आएगा।मनुष्य को तिर्यंच की उपाधि दी जाती है,तिर्यंचों को मनुष्य की उपाधि नहीं दी जाती।जैसे गधा, घोड़ा, गाय, कुत्ता आदि ज्यादा बोलने वालों को बोलते हैं क्या कुत्ते जैसा बोल रहा है।जिसका स्वभाव सीधा-साधा हो उसे गाय कहते हैं।कि अरे यह तो गाय हैं जब आपका स्वभाव बदलेगा,मन बदलेगा तो जीवन में दशा और दिशा सुधरेगी,तो जीवन में शांति और आनंद आता है।फिर जीवन में क्रिया में गंदगी नहीं आती खराब विचार दूसरों के प्रति समाप्त हो जाते हैं उक्त बात साध्वी श्री जी मसा. ने अपने मंगल प्रवचन में कहीं।
साध्वी श्री समकीत गुणा श्री जी मसा.ने अपने प्रवचन में कहा किअनवरत रूप से रोज आप प्रवचन सुन रहे हैं। शांत सुधा रस में विनय विजय जी मसा. ने लिखा है कि जब तक जीवन में अशुभकारी नहीं हटाओगे तब तक शांति नहीं मिलेगी। ध्यान चार प्रकार के बताए हैं आत्मज्ञान जो है इष्ट का सहयोग मिलता है। आर्त ध्यान वह ध्यान है जिसमें अरिष्ठ वस्तु का सहयोग होता है जब देखो वह आगे आता है उसको छोड़ना चाहते हो पर छुटती नहीं है।जैसे पति को पत्नी पसंद नहीं है वह उसको छोड़ना चाहता है पर छुट नहीं रही है।तो यहां मसा. बोलते हैं कि आप शांत हो जाओ। शांत होने से समस्या कम हो जाएगी।आगे के चरण में बताया कि इससे भी खतरनाक ध्यान है रौद्र ध्यान इसमें कुछ क्षणों के लिए गुस्सा आता है और जिंदगी भर रोना पड़ता है।और रौद्र ध्यान वाला मर जाता है तो उसको नरक गति ही प्राप्त होती है।एक गलती होती है परेशानी उठानी पड़ती है। कर्मों का फल तो भोगना ही पड़ता है पता नहीं कितने कर्मों के भव उदय में आते हैं और इस युग में अब तो ऑन द स्पॉट प्रभाव देखने को मिलता है। उक्त विचार श्रोताओं के बीच रखें।
कल रविवार सुबह 7:30 से नवकार की साधना आराधना कराई जाएगी। आराधना के पश्चात प्रवचन होंगे तदुपरांत महा मांगलिक होगी।सौ. वृ.त. त्रीस्तुतिक जैन श्री संघ एवं राज अनंत चातुर्मास समिति, रतलाम के तत्वाधान में बड़ी संख्या में श्रावक एवं श्राविकाए उपस्थित थी।