

रतलाम । जब तक जीते है, तब तक भी हमारी संपत्ति हमारे साथ रहे, यह जरूरी नहीं। मौत के बाद भी संपत्ति साथ नही जाती है। संपत्ति हाथी के कान जैसी इधर से उधर होती है। यह कभी स्थिर नहीं होती है। जब तक आपके पुण्य साथ है, तब तक संपत्ति आपके हाथ में हैं, जब पुण्य चले जाएंगे तो संपत्ति चली जाएगी।
यह बात आचार्य देव श्री नयचंद्रसागर सुरीश्वर जी म.सा. की निश्रा में सैलाना वालों की हवेली मोहन टॉकीज में चल रहे प्रवचन में गणिवर्य डॉ. अजीतचंद्र सागर जी म.सा. ने कही। उन्होंने कहा कि पैसा किसी के पास कम हुआ है तभी आपके पास आया है। संपत्ति जैसे-जैसे बढ़ती है, वैसे-वैसे जीवन में अशांति बढ़ती जाती है। संपत्ति जितनी ज्यादा होगी, मन में खालीपन उतना ही होता है और जिसके पास कम होती है वह आनंद में रहता है। सिर्फ आत्मा है जो साथ रहेगी।
गणिवर्य डॉ. अजीतचंद्र सागर जी म.सा. ने कहा कि भगवान कहते हैं कि इतने आश्वस्त मत बन जाओ जैसे कल कुछ होने वाला नहीं है। श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्री संघ गुजराती उपाश्रय रतलाम एवं श्री ऋषभदेव जी केसरीमल जी जैन श्वेतांबर पेढ़ी रतलाम द्वारा आयोजित प्रवचन श्रृंखला में बड़ी संख्या में श्रावक, श्राविकाए उपस्थित रहे।