सम्मेद शिखरजी तीर्थ पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो : राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ की मांग

  • तीर्थ राज सम्मेदशिखर जी की पवित्रता और सुरक्षा की दृष्टि सेऑनलाइन-ऑफलाइन व्यवस्था की आवश्यकता
  • राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के अध्यक्ष राकेश गोहिल एवं प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि बद्रीनाथ-केदारनाथ की तरह नियम बनें” -राष्ट्रीय जिन शासन एवं भारत वर्षीय सकल जैन समाज की मांग

मधुबन/गिरिडीह/इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । मयंक जैन ने कहा कि विश्व वंदनीय जैन धर्म के सबसे श्रेष्ठ तीर्थ पर्वत राज श्री सम्मेद शिखरजी जो 20 तीर्थंकर भगवान एवं अनंतानंत सिद्ध भगवंतों की निर्वाण भूमि है, की पवित्रता एवं सुरक्षा को लेकर जैन समाज चिंतित । भारत वर्षीय तीर्थ रक्षा कमेटी एवं भारत वर्षीय जैन समाज के वरिष्ठ धर्मप्रेमी बंधुओं का मानना है कि तीर्थ की गरिमा को बनाए रखने हेतु पूज्य प्रभावशाली आचार्य-मुनि भगवंतों के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में तीर्थ क्षेत्र कमेटी, तीर्थ क्षेत्र तलहटी की समस्त कार्यकारिणी, स्थानीय संस्थाओं एवं राजनीति में पकड़ रखने वाले सम्माननीय श्रेष्ठीगण, दानवीर एवं विशेष संस्थाओं का सहयोग संयुक्त रूप से लेकर प्रयास करना चाहिए। समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन ने कहा कि तीर्थ क्षेत्र पर आने वाले यात्रियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो । आगे कहा कि जिस प्रकार बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे बड़े सनातनी तीर्थों पर यात्रियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, उसी प्रकार सम्मेद शिखरजी पर भी पर्वत पर जाने वाले प्रत्येक यात्री का ऑनलाइन एवं ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाए। इसमें जैन एवं जैनेतर सभी यात्री शामिल हों।
दद्दू ने कहा कि प्रतीकात्मक रूप से हर यात्री से 20 से 50 रुपये* की राशि रखी जा सकती है। इससे तीर्थ क्षेत्र पर आने वाले यात्रियों की काउंटिंग, सुरक्षा एवं अल्प आय तीनों संभव हो सकेंगे। क्षेत्र की सुरक्षा एवं निगरानी प्रारंभिक चरण में मजबूत बैरियर एवं वर्दीधारी सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था हो। विशेष रूप से प्रथम गौतम स्वामी टोंक एवं श्री पारसनाथ टोंक के आसपास न्यूनतम 2-2 सुरक्षा गार्ड की तैनाती आवश्यक है। साथ ही उच्च गुणवत्ता के सीसीटीवी कैमरे पुरे क्षेत्र में लगाए जाएं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सोशल मीडिया एवं आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए। उसमें जैन धर्म के सिद्धांत, पहाड़ी , तीर्थ क्षेत्र की पवित्रता एवं आवश्यक दिशा निर्देश स्पष्ट रूप से अंकित हों, जिससे कोई भी यात्री क्षेत्र की पवीत्रता को दुषीत एव गंदगी न करे और श्रद्धा भक्ति विनम्य के साथ तीर्थक्षेत्र की वंदना करे, न कि पिकनिक के भाव से।
ज्ञात है कि शिखरजी में विकास के अनेक कार्य हो रहे हैं। अब आवश्यकता है कि श्रेत्र की पवित्रता एवं सुरक्षा के इस महत्वपूर्ण बिंदु पर भी सभी समाज जन का ध्यान आकृष्ट हो। तीर्थ क्षेत्र कमेटी एवं समाज के बुद्धिजीवियों से अनुरोध है कि इस विषय पर गंभीरता से विचार कर इसे शीघ्र क्रियान्वित करें।
यह संदेश सभी प्रबुद्धजनों तक पहुंचाने का आग्रह किया गया है, ताकि हमारा पावन तीर्थ क्षेत्र अधिक व्यवस्थित एवं सुरक्षित बन सके। जब तक सुरज चांद रहेगा जब हमारा तीर्थ क्षेत्र शिखरजी जयवंत रहेगा।

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