




रतलाम 26 अगस्त । सौ.वृ.त. श्री राजेंद्र सूरी त्रिस्तुतिक जैन श्वेतांबर श्री संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा नीम वाला उपाश्रय खेरादी वास में रतलाम नंदन प.पू. श्री 1008 जैन मंदिर के प्रेरणादाता राष्ट्र संत कोकण केसरी गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद् विजय लेखेन्द्र सूरीश्वर जी म.सा. की आज्ञानुवर्ती एवं मालवमणि पूज्य साध्वी जी श्री स्वयंप्रभा श्री जी म.सा. की सुशिष्य रतलाम कुल दीपिका शासन ज्योति साध्वी जी श्री अनंत गुणा श्रीजी म.सा., श्री अक्षयगुणा श्रीजी म.सा. श्री समकित गुणा श्री जी म.सा. श्री भावित गुणा श्री जी म.सा. उपासना में विराजे हैं जिनका चातुर्मास में नित्य प्रवचन चल रहे हैं इसी तारतम्य में आज सोमवार को साध्वी श्री अनंत गुणा श्री जी मसा ने अपने प्रवचन में कहा कि पूर्व जन्म में जो छल कपट करते हैं और अपने माया से दूसरों को प्रभावित करते हैं उन्हें स्त्री का जन्म मिलता है। माया छल कपट करने वालों की दो ही गति होती है या तो वह स्त्री बनते हैं या फिर तिर्यंच गति में चले जाते हैं। जीवन के अंदर माया आ जाती है तो उसे कुछ मिलने वाला नहीं है। माया, छल कपट आता है तो कई प्रकार के दोष भी साथ में आते हैं।
मनुष्य ही ऐसे हैं जो छल कपट करते हैं पशु,पक्षी नहीं करते पशु, पक्षियों को मोह भी नहीं रहता। चार प्रकार के ग्रह होते हैं जो जीवन को बर्बाद कर देते हैं पहला है कदाग्रह। मैं मेरे हिसाब से सब चल मैं जो बोलूं वह होना चाहिए मैं नहीं बोलूं तो नहीं होना चाहिए इसे कदारगृह कहते हैं कादर ग्रह का मुख्य कारण मैं शब्द है ।हर घर के अंदर झगड़ा क्लेश होता है तो पूरे घर में और जीवन शांति रहती है। कादर ग्रह से मुक्त होने का इलाज यह है छोड़ दो, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है, होने दो। अब तो स्थिति ऐसी हो गई है की बहू को भी संभाल के रखना पड़ता है 2-4 साल में उन्हें सब मालूम पड़ जाता है कि घर में कितना पैसा है और कहां रखा हुआ है। अभी तो यह फैशन चल गई है की शादी करो और तलाक लो और पैसा कमाओ। शादी होते से ही बहू परेशान करने लगती है और तलाक की नौबत पर पहुंचा देती यह जैन समाज के लिए कलंक बन गया है।
कल रविवार को शक्रस्तव अभिषेक संपन्न किया गया। जिसमें भगवान का औषधीय से अभिषेक संपन्न हुआ। कल प्रवचन में आपको कादर ग्रह, हटाग्रह,दूराग्रह और पूर्वाग्रह के बारे में बताया जाएगा। सौ. वृ.त. त्रीस्तुतिक जैन श्री संघ एवं राज अनंत चातुर्मास समिति, रतलाम के तत्वाधान में बड़ी संख्या में श्रावक एवं श्राविकाए उपस्थित थी।