


रतलाम 28 अगस्त । सौ.वृ.त. श्री राजेंद्र सूरी त्रिस्तुतिक जैन श्वेतांबर श्री संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा नीम वाला उपाश्रय खेरादी वास में रतलाम नंदन प. पू .श्री 1008 जैन मंदिर के प्रेरणादाता, राष्ट्र संत कोकण केसरी गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद् विजय लेखेन्द्र सूरीश्वर जी म.सा. की आज्ञानुवर्ती एवं मालवमणि पूज्य साध्वी जी श्री स्वयं प्रभा श्री जी म.सा. की सुशिष्य रतलाम कुल दीपिका शासन ज्योति साध्वी जी श्री अनंत गुणा श्रीजी म.सा,श्री अक्षयगुणा श्रीजी म.सा. श्री समकित गुणा श्री जी म.सा. श्री भावित गुणा श्री जी म.सा. उपासना में विराजे हैं जिनका चातुर्मास में नित्य प्रवचन चल रहे हैं।
इसी तारतम्य में आज बुधवार को साध्वी श्री अनंत गुणा श्री मसा. ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जहां पुण्य का जबरदस्त होता है तो सब कुछ मिलना प्रारंभ हो जाता है और पाप होता है तो मिली हुई चीज भी चली जाती है वासुदेव ने साधुओं की सेवा की ओर सेवा का फल मिलता ही है। सेवा का फल इस भव में सब कुछ पाता है और अगले भाव में जबरदस्त फल मिलता है।भारत महाराज ने 500 – 600 साधु संतों की गोचरी पाली थी। बाहुबली साधु संतों के पैर दबाते थे, मालिश करते थे, उनके काम करते थे तो उन्हें चक्रवर्ती से भी ज्यादा बल मिला।जब तक आप लोग साधु संतों की सेवा नहीं करोगे आपका पुण्य प्रबल कैसे होगा पुण्य प्रबल करने के लिए साधु संतों की सेवा करनी पड़ेगी। जितने भी है सब साता पूछते हैं, यह नहीं बोलते कुछ काम हो तो बोलो मसा.। अपने गुरु महाराज ने गर्भधारण क्या तो उनकी मां को शुभ सपना आया था स्वप्न में उनके संत आए और 1 मोदक लेकर गए थे। क्योंकि आप मानते हो जानते कुछ नहीं जानना भी आवश्यक है।आपको प्रतिक्रमण का मतलब भी नहीं मालूम प्रतिक्रमण का मतलब होता है पापों को हटाना।प्रतिक्रमण स्वयं की आत्मा की आराधना है इसमें किसी की भी जरूरत नहीं पड़ती।यह भी नहीं मालूम कि सामायिक, प्रतिक्रमण क्यों करते हैं। बस करना है जब तक उसको समझोगे नहीं कुछ भी फल मिलने वाला नहीं है हर चीज का ज्ञान होना चाहिए आत्मा के लिए कुछ करते नहीं हो तू पशु की तरह जीवन हो जाएगा। यह आपको स्वयं को फाइनल करना पड़ेगा पशु जीवन जीना है या मनुष्य जीवन जीना है। 24 घंटे में 24 मिनट निकालो और प्रभु की आराधना,साधना और स्वयं का चिंतन करो तो जीवन सार्थक हो जाएगा। पर्यूषण पर्व आ रहा है 8 दिन की साधना करना है वितरागी परमात्मा की वाणी को सुनना है। सभी पर्वों में महापर्व है। 8 दिन आलस प्रमाद नहीं करना है। आराधना साधना चलेगी और प्रवचन भी होगा परीक्षण पर्व पर कर्म बंधन से मुक्ति होनी चाहिए। प्रभु की आराधना साधना में मस्त हो जाओगे तो आपको ना भूख लगेगी ना प्यास। उक्त बात प्रवचन में कहीं। सौ. वृ.त. त्रीस्तुतिक जैन श्री संघ एवं राज अनंत चातुर्मास समिति, रतलाम के तत्वाधान में बड़ी संख्या में श्रावक एवं श्राविकाए उपस्थित थी।