सरस्वती साधना से बन सकते हैं शतावधानी – गणिवर्य डॉ. अजीत चंद्र सागर जी म.सा.

रतलाम। किसी भी कार्य में निपुण होने के लिए सबसे अधिक किसी चीज की आवश्यकता होती है तो वह साधना है। शतावधान या महा शतावधानी बनने के लिए सरस्वती साधना सबसे महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति ने मन लगाकर यह कर ली तो वह सामान्य से असामान्य मनुष्य बन सकता है। यह बात गणिवर्य डॉ. अजीतचंद्र सागर जी म.सा. ने कही।
उन्होंने बताया कि उक्त साधना से रतलाम के गणमान्य जनों को रूबरू कराने के लिए आचार्य श्री नयचंद्र सागर सुरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में आचार्य श्री के शिष्य शतावधान करने जा रहे है। सामान्य तौर पर मनुष्य छोटी-छोटी चीजों में हार मान जाता है लेकिन आपके आत्म शक्ति का चमत्कार देखना हो तो 20 अक्टूबर को सागोद रोड स्थित चंपा विहार में पहुंचना होगा ।
गणिवर्य डॉ. अजीतचंद्र सागर जी म.सा. ने कहा कि हम सामान्य तौर पर दो-चार काम भी ठीक से याद नहीं रख पाते हैं लेकिन सरस्वती साधना के माध्यम से आचार्य श्री के शिष्य, मुनि श्री एक साथ एक समय में 20 व्यक्तियों की बात सुनकर क्रम अनुसार उसका जवाब देंगे। प्रश्न भी कार्यक्रम में उपस्थित लोग पूछेंगे। पहले से कोई प्रश्न तय नहीं किया गया है।
आचार्य श्री की निश्रा में रतलाम में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के साथ शहर के करीब 250 से अधिक बच्चे नियमित रूप से सरस्वती साधना के माध्यम से अपने दिमाग को सुपर पॉवर बनाने में लगे हुए है। अब तक देश भर के 50 हज़ार से अधिक बच्चे सरस्वती साधना के माध्यम से अपने मन और मस्तिष्क को एकाग्र करने में सफल रहे हैं।

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