धर्म आराधना करते हुए पुण्य का बंध हो जाता है यह डूबाने वाला नहीं तिराने वाला होता है – पूज्य पंडित रत्न श्री धर्मेंद्रमुनि जी म. सा.

जावरा (अभय सुराणा) । साधु के नियम होते हैं भगवान स्वयं कहते हैं मैं भिक्षु हूं परिग्रह का त्याग करने से शुद्ध भाव से ,पवित्र भाव से त्याग करता है तो आगे लाभ मिलता है । सभी भगवान क्षत्रिय कुल में जन्म लेते हैं सभी अपने राज्य का त्याग करके संयम ग्रहण करते हैं धन की वृद्धि दुखः बढाती है । उपरोक्त प्रेरक प्रवचन जिन शासन गौरव पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनि जी म.सा. के सुशिष्य धर्मदास गण नायक प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती पूज्य पंडित रत्न श्री धर्मेंद्रमुनि जी म. सा. ने जैन दिवाकर भवन जावरा पर एक महती धर्म सभा में व्यक्त किए। आगे उन्होंने फरमाया कि माला गिनते नींद आती है और नोट गिनते नहीं आती, संसार में परिग्रह की मर्यादा होना चाहिए। मर्यादा नहीं होगी तो अशांति होती है मर्यादा होगी तो संतोष और शांति का लाभ होता है। पुण्य के उदय से सुख शांति मिलती है अगले भव का चिंतन जरूर करना चाहिए। जीव को कर्मबंध होता है धर्म आराधना करते हुए पुण्य का बंध हो जाता है यह डूबाने वाला नहीं तिराने वाला होता है संसार की गाड़ी चल रही है हम सभी को मर्यादा करना और परिग्रह का अधिक से अधिक त्याग करना चाहिए आज की प्रभावना श्री सुरेंद्र सुराणा एवं श्रीमती सुशीला बाई बाबूलाल सुरेंद्र कोलन परिवार की ओर से वितरित की गई। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ने नगर की समस्त धर्म प्रेमी जनता से अधिक से अधिक धर्म लाभ लेने की अपील की सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया। उपरोक्त जानकारी पूर्व महामंत्री सुभाष टुकडिया ने दी।

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