- आज जन्मदिन पर विशेष
- प्रस्तुति – सौरभ जैन (नानू), युवा अध्यक्ष
- जैन दिवाकर विचार मंच युवा शाखा, इंदौर


इंदौर 23 जनवरी l जैन दिवाकर विचार मंच युवा शाखा इंदौर महानगर के युवा अध्यक्ष सौरभ जैन नानू इंदौर ने श्रमण संघीय सह मंत्री परम पूज्य श्री शुभम मुनि जी महाराज साहब के 41 में जन्म दिवस के अवसर पर अपने वक्तव्य में कहा कि जैन धर्म की प्राचीन परंपरा में जहां तीर्थंकर भगवान हुए हैं वहां उनकी परंपरा को आगे बढ़ाने वाले युग प्रधान आचार्य भगवन और उनके कृपा पात्र परम पूज्य श्री शुभम मुनि जी महाराज साहब कि एक लंबी श्रृंखला श्वेतांबर व दिगंबर परंपरा में मिलती है l
जैन परंपरा में श्वेतांबर स्थानकवासी परंपरा का प्रमुख स्थान है इस परंपरा में श्री वर्धमान श्वेतांबर स्थानाकशी जैन श्रमण संघ का प्रमुख योगदान रहा है वर्तमान में श्रमण संघ के चतुर्थ पटट्धर आचार्य सम्राट पूज्य श्री शिव मुनि जी महाराज साहब एवं सह मंत्री श्री शुभम मुनि जी महाराज साहब उच्च कोटि के ध्यान साधक एवं आत्माथी संत हैं l आपका जीवन असंख्य गुणरत्नो का अक्षय-कोष है
यात्रा स्वप्निल से शुभम मुनि की आचार्य भगवन व शिरीष मुनि जी महाराज साहब ने तराशा हीरा
आपका जन्म 23 जनवरी 1984 जन्म स्थान सावल विहिर (शिरडी) महाराष्ट्र में पिता श्री तेजराज जी पीपाड़ा एवं माता श्रीमती निर्मला जी पीपाड़ा कि कोख से हुआ स्थानक में नित्य प्रतिदिन आना जाना वहां पधारे हुए साधु साध्वीयों के प्रवचनों को श्रवण करना, उन्हें आहार पानी के लिए घर ले जाना धार्मिक चर्चाओं में भाग लेना वह रुचि बचपन से ही आप में थी l
आप श्री जी की दीक्षा साधु प्रतीकमन कन्टस्थ कर मात्र 16 दिन के वैराग्य कल में श्री शुभम मुनि जी महाराज साहब की दीक्षा 18 मई 2000 नासिक महाराष्ट्र में दीक्षा संपन्न हुई आप श्रीजी के दीक्षा गुरु श्रमण संघीय चतुर्थ पटट्धर युग प्रधान आचार्य सम्राट परम पूज्य डॉ. श्री शिव मुनि जी महाराज साहब है
गुरुदेव श्री जी कि शिक्षा एम.ए. (जैन धर्म) अध्ययन षंड् दर्शन एवं जैनागम भाषा का ज्ञान मराठी हिंदी गुजराती,मारवाड़ी, पंजाबी, संस्कृत, प्राकृत,अंग्रेजी
उपाधियां
गुरुदेव श्री जी को सन् 2007 मे अंबाला चातुर्मास में 8000 बालको को एक साथ आत्म ध्यान साधना का प्रशिक्षण के दौरान स्थानीय श्री संघ ने आपको युवा मनीषी की उपाधि से अलंकृत किया l
18 जून 2016 को सादड़ी राजस्थान श्रमण संघ की जन्मस्थलीय सादड़ी राजस्थान में प्रवर्तक पूज्य श्री रूपचंद जी महाराज साहब ने आपको सहमंत्री के पद से अलंकृत किया l
गुरुदेव की रुचि संगीत, ध्यान-साधना,बाल-संस्कार, स्वाध्याय, आदि l
परम पूज्य गुरुदेव आचार्य भगवन और परम पूज्य श्री शिरीष मुनि जी महाराज साहब के साथ ध्यान साधना में लीन रहते हैl
आपका जीवन असंख्य गुणरत्नो का अक्षय-कोष है जो भी आपके सानिध्य में पहुंच जाता है वह सदैव के लिए धर्म की शरण में आ जाता है धन्य हो उठी शिरडी महाराष्ट्र जिसमें आपका जन्म हुआ आपका जन्म स्थान कहलाने का सौभाग्य मिला व सावल विहिर भूमि जिसे पैतृक स्थल कहलाने का सौभाग्य मिला 23 जनवरी 1984 को आपका इस धरा पर पदार्पण हुआ जन्म से ही श्री तेजराज पीपाड़ा जी पितृत्व संतुष्ट हुवा व माता श्री मति निर्मला पीपाडा जी की कोक गौरवान्वित हुईl
परम पूज्य गुरुदेव श्री शुभम मुनि जी महाराज साहब का अगस्त 2017 से मुझे सानिध्य प्राप्त हुआ गुरुदेव का सानिध्य पाकर धर्म ध्यान से लगन लगी जब से गुरुदेव की कृपा हुई तब से लेकर अब तक मैं और मेरा पूरा परिवार धन्य हुवा l