नमस्कार महामंत्र जाप युगप्रवर्तक बंधु बेलड़ी आचार्य श्री का पावन स्मरण

रतलाम। रतलाम श्रीसंघ के परम उपकारी परम पूज्य बंधु बेलड़ी नमस्कार महामंत्र जाप युगप्रवर्तकआचार्य श्री जिनचंद्रसागर सूरीश्वर जी महाराज के प्रथम पुण्य स्मरण पर गुणानुवाद सभा रखी गई। कार्यक्रम को निश्रा उनके शिष्यरत्न आचार्य श्री प्रसन्नचंद्रसागरसूरी जी महाराज ने प्रदान की।
आचार्य श्री प्रसन्नचंद्रसागरसूरी जी ने फरमाया कि पूज्य श्री संयम पालन करने और करवाने में चुस्त थे साथ ही अंदर से नरम दिल भी थे । वह अपने समस्त शिष्यों और प्रशियों को बहुत प्यार करते थे और उनके प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहते थे । वे व्यस्तता के बाद भी सभी शिष्यों को स्वाध्याय पूछते थे और उसका अभ्यास भी करवाते थे। चुस्त संयम पालन कैसे करना, इसका अभ्यास भी करवाते थे ।
सर्वप्रथम पूज्य श्री द्वारा मांगलिक श्रवण करवाई गई तत्पश्चात युवा प्रबोधन के संपादक गणतंत्र मेहता द्वारा गुणानुवाद सभा के आयोजन पर प्रकाश डाला गया।श्री मेहता ने पूज्यश्री का जीवन परिचय एवं दीक्षा पर्याय में पूज्य आचार्य श्री द्वारा की गई धार्मिक क्रियाओं एवं नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पूज्यश्री को नमस्कार महामंत्र जाप युगप्रवर्तक की उपाधि भी प्रदान की गई थी। प्रदीप डांगी ने कविता के माध्यम से पूज्यश्री का गुणानुवाद किया।
संघ अध्यक्ष विनोद मूणत ने रतलाम श्रीसंघ पर पूज्यश्री के उपकार का वर्णन करते हुए बताया कि पूज्य श्री ने श्री संघ को अनेक सौगते प्रदान की है।कार्यक्रम में दिलीप चौधरी ने पूज्यश्री की सरलता एवं सहजता पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर पूज्य श्री के संघ पर उपकार को याद करते हुए श्रीसंघ के 16 लाभार्थियों द्वारा प्रभावना श्री संघ में वितरित की गई । प्रथम पुण्यतिथि के निमित्त बिबरोद जैन तीर्थ पर प्रति रविवार भाता की शुरुआत का संकल्प लिया गया। जिसमें 52 सप्ताह के रविवार को पूजन करने आने वाले दर्शनार्थियों को भाता प्रातः 11 बजे तक निः शुल्क प्रदान किया जाएगा। जिसमें श्रीसंघ के श्रावकों द्वारा इसका लाभ लिया गया और 32 रविवार का लाभ प्रदान किया ।संचालन गणतंत्र मेहता एवंआभार विनोद जी मूणत ने व्यक्त किया।