जीवन के पांच विष विवाद,अज्ञान, ईर्ष्या, चिंता और कुटिलता- मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज

इंदौर (राजेश जैन दद्दू ) । मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में विवाद विषय पर प्रवचन देते हुए कहा कि यह जीवन हमें उन्नति के लिए मिला है लेकिन उसे हम अवनति में बहा रहे हैं। जीवन में बहुत सारी क्रियांएं ऐसी हैं जो विष का काम करती हैं। विवाद, अज्ञान, ईर्ष्या, चिंता और कुटिलता यह जीवन के सबसे बड़े पांच विष हैं। विवाद विष की चर्चा करते हुए मुनि श्री ने कहा कि वर्तमान में धर्म समाज संस्कृति के क्षेत्रों और घर परिवार में कई लोग छोटी-छोटी बातों पर विवाद कर अपनी एनर्जी खत्म करते रहते हैं। विवाद से ही कषाय और बैर उत्पन्न होता है और हमारे जीवन की सुख शांति भंग होती है। इसलिए विवाद की स्थिति होने पर विषमवाद ना करें। समझदार व्यक्ति विवाद का विष नहीं पीते समाधान ढूंढते हैं क्योंकि वह जानते हैं की विवाद करने और कराने से मिलता कुछ नहीं दुर्गति ही होती है, इसलिए जीवन में विवाद को कभी स्थान मत दो और विवाद की स्थिति होने पर इग्नोराय नमः बोल कर मौन धारण कर लेते हैं।
धर्म सभा का शुभारंभ पंडित रमेशचंदजी बांझल के मंगलाचरण से हुआ, पूर्व आरटीओ श्री पीसी जैन परिवार ने मुनि श्री के पाद प्रक्षालन कर एवं श्रीमती लता हीरालाल शाह ने मुनि श्री को शास्त्र भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर कैलाश जैन नेताजी, वीरेंद्र देवरी, राजेश जैन दद्दू,डॉ जैनेंद्र जैन, अरविंद सोधिया, राजेंद्र नायक अखिलेश सोधीया आदि उपस्थित थे। धर्म सभा का संचालन जिनालय ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र जैन ने किया।

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