

रतलाम । भगवान का प्रतिदिन दर्शन संकीर्तन करने से आनंद की प्राप्ति होती है और आनंद ही भगवान का तीसरा स्वरूप है यह बात रत्नावत परिवार द्वारा श्री कालिका माता सत्संग हॉल में आयोजित भागवत कथा के दौरान कथा वाचिका देव प्रिया माही किशोरी श्री धाम वृंदावन में उपस्थित श्रद्धालुओं से कहीं ।
उन्होंने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं, राधा कृष्ण विवाह तथा पूतना वध का विस्तृत वर्णन किया । कथा वाचिका माही किशोरी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण के जन्म की गोकुल में खुशियां मनाई जा रही थी आनंद हो रहा था वही मथुरा के कारागार में देवकी के अष्टम गर्भ से जन्म की सूचना कंस को मिली वह तुरंत कारागार पहुंचा तथा जन्मी कन्या को देखकर उसे ले गया व कन्या को पटक कर मारना चाहा पर वह कन्या उड़कर आकाश में चली गई तथा आकाशवाणी हुई कि तुझे मारने वाले ने तो जन्म ले लिया है यह कहकर वह कन्या अंतरध्यान हो गई वह कन्या और कोई नही साक्षात भगवती योग माया थी ।
उन्होंने कहा कि जो अज्ञान रूपी है तथा अपवित्र है वही पूतना है। राक्षसी पूतना ने जैसे ही नन्हे भगवान कृष्ण को विष का दूध स्तन से पिलाना चाहा भगवान ने अपना स्वरूप दिखाया तथा उसे पटक कर मार दिया और पूतना का उद्धार किया । गोवर्धन पूजा के बाद भगवान् को छप्पन प्रकार के पकवानो का भोग लगाकर अन्नकूट उत्सव मनाया गया ।
इस अवसर पर देव प्रिया माही किशोरी का स्वागत मुख्य जजमान हरिश्चंद्र, मधुबाला, शशांक ,चहेती रत्नावत व संतोष गोपाल वेद, प्रतीक्षा रवि गुप्ता,सुनीता अशोक गुप्ता, कृष्णा प्रेमकुमार धनोतिया,डॉ अनिला कंवर,सलोनी सेठिया ,गौरी सेठिया,सुहानी वेद, यश गुप्ता,रतनलाल पाटीदार, अरविंद गुप्ता,डॉ पवन मजावदिया,अनिता महेश शर्मा,तारा गोपाल पालीवाल,पुनीत शर्मा, उषा विजय गुप्ता,शैलेंद्र सितूत आदि ने किया l इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी श्री देवस्वरूपानंदजी अखंड ज्ञान आश्रम रतलाम स्वामी श्री नारायणानंदजी श्री वामदेव ज्योर्तिमठ वृन्दावन स्वामी श्री अच्युतानंदजी हरिद्वार तीनों संतो का सभी को सानिध्य मिला सभी संतो का रत्नावत परिवार द्वारा शाल श्रीफल से स्वागत व सम्मान किया एवं उनके आशीर्वचनों का लाभ मिला। अंत में आरती कर प्रसादी वितरित की गईl राकेश पोरवाल ने बताया कि 5 जुलाई शनिवार को कथा के दौरान भगवान श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह की प्रसंग का वर्णन किया जाएगा ।