गुरु के पास जाना हो तो माया और अभिमान को छोड़कर समर्पण भाव से जाना चाहिए – विदुषी साध्वी श्री सरिता श्री जी म.सा.

जावरा (अभय सुराणा) । गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर दिवाकर भवन जावरा पर चातुर्मास हेतू विराजीत तपस्वीनि विदुषी साध्वी श्री सरिता श्री जी म.सा.मधुर व्याख्यानी साध्वी श्री प्रियंका श्री जी म.सा. आदि ठाणा 2 धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिसके जीवन में गुरु नही उसका जीवन शुरू नहीं जैसे हर पर्वत पर माणिक नहीं होते हैं, हर हाथी के मस्तिष्क पर मोती नहीं होती है, हर वन में चन्दन वृक्ष नहीं मिलता है उसी तरह हर जगह में सज्जन साधु पुरूष नहीं मिलता है भाग्य से मिले तो मत छोड़ना। गुरु के पास जाना हो तो माया और अभिमान को छोड़कर समर्पण भाव से जाना चाहिए। क्यों कि गुरु अपने पास आने वालों को आनन्द से भर देते है सभी सागर की स्याही करे और सभी वन की लकड़ी की कलम से भी गुरु की महिमा का वर्णन नही किया जा सकता है जैसे दीपक को जलने के लिये तेल की आवश्यकता होती हैं उसी प्रकार जीवन को चलाने के लिये गुरु का होना आवश्यक है गुरु के सम्मान में हर साल आषाढ़ पूर्णिमा पर गुरु पर्व मनाया जाता है, इसे गुरु पूर्णिमा कहते हैं. ये गुरु के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन होता है क्योंकि गुरु ही शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और वे ही जीवन को ऊर्जामय बनाते हैं. गुरु के बिना ज्ञान और मोक्ष दोनों ही प्राप्त करना असंभव है.जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।शास्त्रों में गु का अर्थ बताया गया है- अंधकार या मूल अज्ञान और रु का का अर्थ किया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है। अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को ‘गुरु’ कहा जाता है। हमारी आत्मा में अनंत गुण है लेकिन उन्हे विकसित गुरु ही कर सकते है जैसे भक्ति की आवश्यकता देवता के लिए है वैसी ही गुरु के लिए भी। बल्कि सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है। गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं है।उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल टुकड़ियां एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि तपस्वी रत्न प्रकाशजी पितलीया ने 54 उपवास के प्रत्याख्यान महासती जी से लिए प्रतिदिन आयम्बिल एकाशन उपवास की लड़ी चल रही है गुरु पूर्णिमा एवं चार्तुमास के पावन अवसर प्रवचन की प्रभावना समाजरत्न बसंतीलाल जी धनसुख जी अनुकूल जी अनुष जी चौरडिया परिवार ने लिया।धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया।