धर्मदास गणनायक प्रवर्तक पूज्य श्री जिनेंद्रमुनिजी म.सा. के सानिध्य में मालव केसरी श्री सौभाग्यमलजी म. सा. की 41 वीं पुण्यतिथि जप-तप से मनाई जाएगी

पुण्यतिथि के प्रसंग पर सामूहिक बेले तप आराधना होगी

रतलाम, 16 जुलाई । आचार्य श्री उमेशमुनिजी म.सा. के सुशिष्य धर्मदास गणनायक प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी म.सा., श्री अतिशयमुनिजी म.सा, रत्नपुरी गौरव श्री सुहासमुनिजी म.सा. आदि ठाणा-9 वर्षावास हेतु डीपी परिसर लक्कड़पीठा पर विराजित है। वहीं पुण्यपुंज साध्वी पुण्यशीलाजी, अनुपमशीलाजी, रत्नपुरी गौरव अनंतगुणाजी आदि ठाणा – 10 गौतम भवन सिलावटों का वास पर विराजित है। संत मंडल व साध्वी मंडल के सानिध्य में यहां पर प्रतिदिन विविध आराधनाएं संपन्न हो रही है। जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक, श्राविकाएं उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। वही बड़ी संख्या में आराधक तप आराधना में रमे हुए हैं। प्रवर्तक जिनेंद्रमुनिजी, मुनिमंडल एवं साध्वी मंडल के सानिध्य में श्री धर्मदास जैन श्री संघ द्वारा 19 जुलाई शनिवार को मालव केसरी, प्रसिद्ध वक्ता, महाराष्ट्र विभूषण पूज्य गुरुदेव श्री सौभाग्यमलजी म. सा. की 41 वी पुण्यतिथि जप, तप, त्याग, तपस्या एवं विभिन्न आराधनाओं के साथ उत्साहपूर्वक मनाई जाएगी। इस अवसर पर श्रावक- श्राविकाएं सामूहिक बेला दो उपवास की तप आराधना करेंगे। बेले तप की आराधना शुक्रवार 18 जुलाई से प्रारंभ होगी।
चातुर्मास समिति के मुख्य संयोजक व धर्मदास गणपरिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शांतिलाल भंडारी एवं श्री धर्मदास जैन श्री संघ के अध्यक्ष रजनीकांत झामर व महामंत्री विनय लोढ़ा ने बताया कि इस अवसर पर डीपी परिसर लक्कड़पीठा पर प्रातः 9 से 10 बजे तक विशेष गुणानुवाद सभा का आयोजन होगा। जिसमें मुनि व साध्वी मंडल मालव केसरी श्री सौभाग्यमलजी म.सा. के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे। वाणी के जादूगर, परस्पर प्रेम एवं भाईचारे के ध्वजवाहक, श्रमण संघ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान के लिए मालव केसरी श्री सौभाग्यमलजी म.सा. को पूरे भारतवर्ष में श्रद्धा के साथ याद किया जाता हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान व महाराष्ट्र आपके विचरण के प्रमुख क्षेत्र रहे हैं। श्री संघ ने मालव केसरी श्री सौभाग्यमलजी म.सा. की पुण्यतिथि दिवस पर अधिक से अधिक धर्म आराधना करने का आह्वान किया हैं।
यहां ज्ञान, दर्शन, चारित्र एवं तप की विशिष्ट आराधना में श्रावक-श्राविकाएँ उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। प्रवर्तक श्रीजी एवं मुनिमंडल, साध्वी मंडल के सानिध्य में प्रतिदिन राईय प्रतिक्रमण, प्रार्थना, व्याख्यान प्रातः 09 से 10 बजे तक, दोपहर में वाचनी एवं ज्ञान चर्चा, शाम को देवसिय प्रतिक्रमण, चौवीसी आदि विविध धर्माराधनाएं हो रही हैं। यहां प्रतिदिन अनेक श्री संघो के श्रावक, श्राविकाएं संयमी आत्माओं के दर्शनार्थ पहुंच रहे हैं ।