व्यवहार को अच्छा बनाने का मंत्र है मुस्कुराने की आदत डालो – श्री डॉ कमलप्रज्ञा जी म.सा.

रतलाम। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ नीमचौक रतलाम पूज्याश्री डॉ कमलप्रज्ञा जी म.सा. आदि ठाणा-४ ने कहा कि व्यवहार क्या है, व्यवहार कैसे बनता है, व्यक्ति की सोच से बनता है व्यवहार, व्यक्ति के आचार से बनता है व्यवहार, जीवन को सादा और सोच को उच्च रखना चाहिये।
अधिक धन ज्यादा समय तक काम नहीं आता है, काला पति या काली पत्नी चलेगी यदि उसका व्यवहार अच्छा है, गोरा पति या गोरी पत्नी अगर लड़ाकू है तो कोई काम की नहीं । व्यवहार को अच्छा कैसे बनाएं । इसके 05 सूत्र है । जिसमें पहला है जीवन की गाड़ी में विनम्रता का ग्रीस लगावे ताकि जीवन की गाड़ी स्मूथ चल सके ।
रंग का, रूप का, ज्ञान का, धन का अभिमान कभी मत करो कल तक महलों में रहने वाले आज झोपड़ों में आ गए हैं और चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री भी बन सकता है। जब भी आपके अंदर अभिमान आए तो ऊपर आकाश की और देखो और सोचो की आकाश कितना विशाल है और मैं कितने तुच्छ हूँ, नीचे जमीन की मिट्टी को देखो की अंत में मिट्टी में ही महीना है ।
झुकने में कैसी शरम, गौतम गणधर से आनंद श्रावक ने पूछा की क्या श्रावक को अवधि ज्ञान हो सकता है तब गौतम स्वामी ने कहा की श्रावक को अवधि ज्ञान नहीं हो सकता है तब आनंद श्रावक ने कहा मुझे अवधि ज्ञान हो चुका है, गौतम स्वामी ने कहा आप मिथ्या बोल रहे हैं झूठ बोल रहे हैं और फिर जब गौतम स्वामी महावीर स्वामी के पास पहुंचते हैं तब महावीर स्वामी ने कहा की आनंद श्रावक सच बोल रहा था आपको जाकर उनसे क्षमा मांगना चाहिए तब गौतम स्वामी जो कि भगवान महावीर के प्रथम गणधर थे उसके बाद भी वह अपना अभियान छोड़कर आनंद श्रावक के पास जाते हैं और क्षमा याचना करते हैं ।
तीन व्यक्ति पंचांग नमस्कार के अधिकारी है माता-पिता, गुरु-गुरुणी और प्रभु परमात्मा ।
व्यवहार को अच्छा बनाने का दूसरा मंत्र है मुस्कुराने की आदत डालो, मुस्कान चंदन के उसे तिलक के समान है जिसके माथे पर लगता है उसको भी शीतलता और खुशबू देता है और जो लगता है उसको भी शीतलता और खुशबू देता है । आप प्रतिदिन किसी को उपहार नहीं दे सकते हैं न ही प्रतिदिन किसी से उपहार ले सकते हैं लेकिन आप प्रतिदिन किसी को अपनी मुस्कुराहट दे सकते हैं । जब भी दुकान खोलो तो मुस्कुराते हुए दुकान का शटर खोलो, स्थानक भवन में कदम रखते ही मुस्कुराओ। आपके पास जो कोई भी आए वह आपसे नाराज होकर कभी ना जाए। मुस्कुराओ पर कभी किसी का मजाक मत उड़ाओ हंसो लेकिन कभी किसी की हंसी मत उढ़ाओ । कितना भी उतार चढ़ाव, लाभ हानि, सम्मान अपमान हो कितनी भी विषम परिस्थिति हो मुस्कुराहट को अपने चेहरे से कभी गायब मत होने दो । व्यवहार को अच्छा बनाने की तीसरा नियम है मीठे शब्दों का प्रयोग करो । धन से भले ही दरिद्र हो जाओ लेकिन वचन से कभी दरिद्र मत होना । सोच समझकर शब्दों का प्रयोग करो । हर बात सोचने की होती है लेकिन हर बात बोलने की नहीं होती है, बुद्धिमान व्यक्ति सोच कर बोलता है वह बुद्धू व्यक्ति बोलने के बाद सोचता है । सोचिए वही जो बोल सको, बोलिये वही जो लिख सको और लिखिए वही जिस पर हस्ताक्षर कर सको। रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाए पर वचन न जाए ।
अपने शब्दों को अपनी जुबान को कैची मत बनाओ जो काटने का काम करे बल्कि सुई बनाओ जो की जोडऩे का काम करे।
किसी को चार मिठाई नही खिला सकते कोई बात नही लेकिन उससे चार मीठे शब्द जरूर बोल सकते हो। व्यवहार अच्छा बनाने का चौथा नियम है कभी किसी की निंदा आलोचना मत करो आज जो आपके सामने किसी और की आलोचना कर रहा है वह किसी और के सामने कल आपकी आलोचना करेगा, नजरे बदलते ही नजारे बदल जाते हैं इसमें कभी किसी की निंदा और आलोचना में मत पढ़ो ।
व्यवहार को अच्छा बनाने का पांचवा नियम है हमेशा हितकारी सोचो आज का व्यक्ति बहुत ही सेल्फिश हो चुका है या तो बस स्वयं के बारे में सोचता है या फिर ज्यादा से ज्यादा अपनी पत्नी बच्चे और परिवार और माता-पिता के बारे में सोचता है। घर में अगर ब्रेड खराब हो जाए तो खुद नहीं खाएंगे परिवार को नहीं खाने देंगे, लेकिन बाहर किसी गरीब भिखारी को दे देंगे, आप तो पैसे वाले हो, अपना इलाज भी करवा लेंगे लेकिन वह बेचारा गरीब अपने इलाज कैसे करवाएगा, रहे भावना ऐसी मेरी सरल सत्य व्यवहार करूं बने जहां तक जीवन में औरों का सत्कार करूं।
यह सब जीवन के छोटे-छोटे सूत्र हैं जिनसे जीवन उन्नत समृद्ध वह खुशहाल बनेगा पूज्य श्री अमित प्रज्ञा जी महाराज साहब ने फरमाया कि धर्म किसे कहते हैं वस्तु का स्वभाव ही धर्म है, आचार ही धर्म है, दया धर्म है, सेवा धर्म है, सामायिक करना प्रतिक्रमण करना तप करना धर्म है ।
धर्म करने से क्या मिलता है संसार समुद्र के बहते हुए पानी में जन्म और मृत्यु के गोते लगा रहे मनुष्य के लिये है धर्म एक टापू के समान है।
गुरु की शरण में जाने वाला व्यक्ति कभी किसी से नहीं डरता है, शरीर की सुरक्षा के लिए हेलमेट और जूते पहने जाते हैं आत्मा की सुरक्षा के लिए धर्म किया जाता है । जब आपकी जेब में पैसा होता है तभी व्यक्ति आपका सुरक्षा कवच बनता है लेकिन धर्म का सुरक्षा कवच हमेशा काम में आता है।
लाखों साल पहले धर्म था आज भी धर्म है लाखों साल बाद भी धर्म की शरण रहेगी । जल के बिना कपड़ों की धुलाई नहीं होगी रंग के बिना मकान की पुताई नहीं होगी धर्म के बिना आत्मा की सफाई नहीं होगी।
धर्म को कभी आजमाने की जरूरत नहीं पडऩा चाहिए, मैं स्वयं आधा किलोमीटर में पैदल नही चल पाती थी, मेरे इतने पैर दुखते थे कि मेरी भाभी रात को मेरे पैर दबाती थी, हर दो चार महीने में मुझे बहुत तेज बुखार आता था, घूमना फिरना अच्छे कपड़े पहनना यही मेरा जीवन था लेकिन जब मैं पूज्य महासती जी के शरण में आई वह पहली बार उनके साथ 15 किलोमीटर का विहार किया तब मुझे मेरे पैरों में जरा भी दर्द नहीं हुआ, मेरा बुखार गायब हो गया, मुझे कभी नियमित बुखार नहीं आया, धर्म की शरण में आने के बाद मेरा जीवन बदल गया । 24 घंटे में से केवल 48 मिनट अपनी आत्मा के लिये निकालिए, 48 मिनट भी नहीं दे सकते हो तो हर घंटे में से केवल 02 मिनट अपनी आत्मा के लिये निकालिए।
धन के पीछे भागते हो उसकी बजाए धर्म के पीछे भागो, क्योंकि धन के अंत में न आता है जो की नरक की ओर ले जाता है, और धरम के पीछे म आता है जो कि मोक्ष की और ले जाता है । फैसला आपका है आपके नरक में जाना है या मोक्ष में जाना है।
संघ प्रवक्ता ने बताया कि वर्षावास में तपस्याओं का दौर लगातार जारी है इसी श्रंखला में कुमारी आशी चानोदिया के 09 उपवास पूर्ण होने पर श्रीसंघ द्वारा तपस्वी का बहुमान किया गया। गुरुवार प्रात: 09 से 10 महामंगलकारी अनुष्ठान होगा जिसके लाभार्थी घेवरमल जी रवि कुमार बोथरा परिवार है। श्रीसंघ पदाधिकारियों ने इस अनुष्ठान में अधिक से अधिक संख्या में पधारकर लाभ लेने का निवेदन किया है ।

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