- महान गुरू वहीं जो जीरो बनकर शिष्य को हीरो बनाते-पदमकीर्तिजी म.सा.
- महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. के सानिध्य में गुरू गुणानुवाद एवं तेला तप करने वाली चार बेटियों की अनुमोदना

भीलवाड़ा,27 जुलाई। जीवन में कोई भी दुःख नहीं चाहता है। किसी की आह लेंगे तो जीवन खराब ओर वाह लेंगे तो जिंदगी आनंदमय हो जाएगी। वाह प्राप्त करने वाले कम ही लोग होते है। जीवन में वाह-वाह प्राप्त करने वाले दुर्लभ होते है। ऐसे ही दुर्लभ रत्न आचार्य आनदंऋषिजी म.सा., उपाध्याय केवलमुनिजी म.सा एवं दादा गुरूदेव पूज्य नंदलालजी म.सा. रहे है। इनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी एवं मार्गदर्शक है। ये विचार अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासाध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. ने रविवार को आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा सुभाषनगर श्रीसंघ के तत्वावधान में दिवाकर कमला दरबार में आचार्य आनदंऋषिजी म.सा. की 125वीं जयंति, उपाध्याय केवलमुनिजी म.सा. की जयंति एवं दादा गुरूदेव पूज्य नंदलालजी म.सा. की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन गुणानुवाद दिवस पर प्रवचन में व्यक्त किए। इस अवसर पर साध्वी मण्डल के सानिध्य में तेला तप करने वाली चार बेटियों की अनुमोदना करते हुए अभिनंदन भी किया गया। प्रवचन में कुमुदलताजी म.सा. ने इन महान गुरूओं के जीवन परिचय के साथ उनकी धर्म साधना से जुड़े प्रसंगों ओर जिनशासन की प्रभावना के लिए किए गए कार्यों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा बचपन में जागृत हो जाए तो 55 संवर जाता है ओर पचपन में जागृत हो तो बुढ़ापा संवर नहीं पाता है। धर्मसभा में स्वर साम्राज्ञी महासाध्वी महाप्रज्ञाजी म.सा.ने मधुर स्वरों में भजन के माध्यम से आचार्य आनंदऋषिजी म.सा.,उपाध्याय केवलमुनिजी म.सा. एवं पूज्य नंदलालजी म.सा. को भावाजंलि अर्पित की। वास्तुशिल्पी पद्मकीर्तिजी म.सा. ने सुखविपाक सूत्र के दस अध्याय में से तीसरे अध्याय का वाचन शुरू करते हुए कहा कि चातुर्मास का सार क्षमा में है। क्षमा प्रदान करने वाला महान होता है। आचार्य आनंदऋषिजी म.सा.,उपाध्याय केवलमुनिजी म.सा. एवं नंदलालजी म.सा. जैसे गुरूओं का जीवन हमे प्रेरणा एवं सीख देता है। गुरू जीरों बनकर शिष्य को हीरो बनाते है। ऐसे गुरूओं के नाम का स्मरण करने से भी जीवन में आनंद की अनुभूति होती है। धर्मसभा में विद्याभिलाषी साध्वी राजकीर्तिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में उस समय हर्ष-हर्ष जय-जय के जयकारे गूंजायमान हो उठे जब तेला तप करने वाली चार बेटियों ने प्रियांशी जैन, लक्ष्मी जैन,तनीषा कोठारी,हितांशी खटोड़ ने तेले के प्रत्याख्यान महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. के मुखारबिंद से ग्रहण किए। महासाध्वी मण्डल ने तपस्या की अनुमोदना करते हुए बेटियों की इस तप साधना को प्रेरणादायी बताया। तपस्वी बेटियों को महिला मण्डल की सदस्याएं स्वागत के साथ मंच तक लेकर आई। सुभाषनगर महिला मण्डल एवं बालिका मण्डल द्वारा भी तप की अनुमोदना की गई। तपस्वियों का सम्मान तप की बोली लेने वालों ने किया। तपस्वियों की अनुमोदना में प्रवचन के बाद चातुर्मास समिति द्वारा चौबीसी का आयोजन भी किया गया। चौबीसी का लाभार्थी लाड़देवी अनिलकुमार अखिल राहुल कोठारी परिवार रहा। चौबीसी के बाद अल्पाहार का आयोजन किया गया जिसका लाभ खटोड़ एवं कोठारी परिवार ने लिया।
पर्युषण महापर्व में सामूहिक तेला तप आराधना 20 अगस्त से
धर्मसभा का संचालन कर रहे चातुर्मास समिति के सचिव राजेन्द्र सुराना ने बताया कि महासाध्वी मण्डल की प्रेरणा से पयुर्षण महापर्व के पहले दिन 20 अगस्त से सामूहिक तेला तप आराधना शुरू होगी। महासाध्वी मण्डल की भावना है कि 500 से अधिक तेला तप हो इसके लिए अधिकाधिक तेला तप करने के साथ अन्य श्रावक-श्राविकाओं को भी इसके लिए प्रेरित करना है। धर्मसभा में कई श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास,आयम्बिल, एकासन, तप के प्रत्याख्यान भी लिए। धर्मसभा की अध्यक्षता चैन्नई निवासी पवन कोचेटा ने की जबकि मुख्य अतिथि चैन्नई के पंवन खिंवेसरा थे। विशिष्ट अतिथि मैसूर निवासी रवि बोहरा थे। अतिथियों का स्वागत आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति एवं सुभाषनगर श्रीसंघ के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। स्वागत करने वालों में चातुर्मास समिति के अध्यक्ष दौलतमल भड़कत्या,सचिव राजेन्द्र सुराना, सुभाषनगर श्रीसंघ के मंत्री बंशीलाल बोहरा,अनिल कोठारी, राजेन्द्र चण्डालिया,महेन्द्र खटोड़,रोहित कोठारी आदि शामिल थे।ं धर्मसभा में भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों सहित कई स्थानों से आए श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। नियमित चातुर्मासिक प्रवचन सुबह 8.45 से 10 बजे तक होंगे।