
रतलाम। श्रुति संवर्धन वर्षा योग 2025,श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर स्टेशन रोड, रतलाम आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी म. सा. के शिष्य मुनि श्री 108 सद्भाव सागर जी म.सा. एवं क्षुल्लक 105 श्री परम योग सागर जी म.सा. द्वारा चंद्रप्रभा मंदिर पर विराजित है।
मुनि श्री 108 सद्भाव सागर जी म.सा. द्वारा व्याख्यान दिया जा रहा है इसके अंतर्गत आज जिसका ज्ञान शुद्ध है, उसका चारित्र भी शुद्ध है जिनवाणी ने कभी शत्रु से द्वेष रखने की भावना नहीं की। द्वेष रखने से कर्मो का बंधन होगा और राग रखने से मोह उत्पन्न होगा इसीलिए राग और द्वेष नहीं रखना चाहिए। सम्यक का अर्थ है राग और द्वेष नहीं रखना और समभाव में रहते हुए अपनी आत्मा को मोक्ष की गति प्रदान करना। जिनवाणी जीवों के अन्तष के कालिख को हटाने वाली है। पुण्य का वर्धन और पाप का मर्दन करने वाली है और आकांक्षा दुख देने वाली और सुख की शत्रु है।
जाप का अर्थ है जो जपा जाये वही जाप है ।जाप तीन प्रकार के होते हैं पहले उपांशु जप जिसमें मंत्र का उच्चारण धीमी स्वर में होता है की पास में बैठे हुए व्यक्ति को भी सुनाई ना दे। दूसरा वाचिक जाप होता है जिसमें पास में बैठे हुए व्यक्ति को स्पष्ट रूप से सुनाई देता है और तीसरा मानसिक जाप होता है जिसमें मन पूरी तरह से जप में लगा रहता है।जो सभी कर्मों की निर्जरा करता है यह मानसिक जाप ही सर्वश्रेष्ठ जाप है। अविकारी होना ही योग्य है और निमित् होने पर ही अविकारी बने रहना ही श्रेष्ठ है। निमित्त सशक्त है तो उपादान मध्यस्थ रहेगा तो आप जीत जाओगे और अगर निमित्त मध्यस्थ रहेगा तो उपादान सशक्त हो जाएगा तो कर्मों का बंधन होगा। संसार में बैर का त्याग करो किसी को देखकर अकारण बैर आये तो मध्यस्थ हो जाओ कर्म कहेगा सशक्त बनो परंतु उसे समय मध्यस्थ बनना आवश्यक है। जीव को हमेशा अपने कर्मों का परीक्षण करते रहना चाहिए इसीलिए विस्मरण शक्ति को जागृत करना चाहिए।भूलना ही धर्म है पाप हो भी जाए तो प्रायश्चित कर लो और आगे न हो उसका ध्यान रखो। जिनमें जितने अंशो का में राग है उतने अंशो का बंध रहेगा। विशुद्ध क्रिया नहीं कर सकते तो उसे बदल दो, नहीं तो अल्प कर दो, पुण्य क्रिया की शक्ताश बढ़ा लो। राग के अंश अधिक है तो विराग के अंश कम हो जाएंगे और विराग के अंश अधिक है तो राग के अंश कम हो जाएंगे। इसीलिए पुण्य क्रियाएं कर लो,तो सुख मिल जाएगा। इस जीवन में जिन मुद्रा को अंगीकार कर मोक्ष मार्ग की और गतिशील हो सकोगे । उक्त व्याख्यान प्रवचन श्रृंखला में दिये।
चातुर्मास के दौरान चातुर्मास समिति एवं समाज जनों ने सवा करोड़ नवकार मंत्र का जाप करने का संकल्प लिया हैं। जिसे पूर्ण करने हेतु समाज जनों द्वारा प्रतिदिन श्री चंद्रप्रभ दिगम्बर जैन मंदिर पर सामुहिक रूप से रात्री 8:00 से 9:00 बजे तक जाप किया जा रहा है।उक्त जानकारी श्री चन्द्रप्रभ दिगम्बर जैन श्रावक संघ रतलाम के संयोजक मांगीलाल जैन ने दी।