जनेऊ मात्र धागा नहीं, ब्रह्मचर्य व मर्यादा की अटूट डोर – पुष्पेन्द्र जोशी

रतलाम। “जनेऊ कोई साधारण धागा नहीं, बल्कि एक मजबूत रस्सी है जो धारण करने वाले को नैतिक और आध्यात्मिक रूप से गिरने नहीं देती। यह मर्यादित जीवन का प्रमाण है। जो ब्राह्मण इसे धारण नहीं करते, उनके नैतिक पतन की संभावना अधिक रहती है।” यह विचार सर्व ब्राह्मण समाज के संयोजक पुष्पेंद्र जोशी ने गंगा आश्रम पर आयोजित श्रावणी उपाकर्म के अवसर पर व्यक्त किए।
जोशी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में जनेऊ का महत्व और बढ़ गया है। “मनुष्य, परिवार, समाज, देश और दुनिया को बचाने की क्षमता जनेऊ में है, यही विश्व में शांति स्थापित कर सकती है,” उन्होंने जोर देकर कहा।
कार्यक्रम के आचार्य पंडित चंद्रशेखर जोशी ने श्रावणी के सामाजिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर पंडित कन्हैया लाल तिवारी, डॉ. रविन्द्र उपाध्याय, कृष्ण गोपाल आचार्य, डॉ. आई.पी. त्रिवेदी, नरेंद्र जोशी, शैलेन्द्र तिवारी, सुरेश जोशी, महेश चंद्र जोशी, शरद शुक्ला, भवानी शंकर मोड़, श्रीराम दिवे, संजय दीक्षित, पार्षद विशाल शर्मा, सत्यदीप भट्ट, अनुराग लोखंडे, जगदीश उपाध्याय, उत्तम शर्मा, चैतन्य भट्ट, चेतन शर्मा, अजय शर्मा, सुशील भट्ट, भारत किशोर उपाध्याय, विकास शर्मा, नर्मदा शंकर भट्ट, सुहास चितले, भेरू शंकर व्यास सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। आभार पंडित आदित्य सुनील शर्मा माना। उक्त जानकारी सर्व ब्राह्मण समाज संयोजक पुष्पेंद्र जोशी ने दी

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