
रतलाम। पूज्य दिगंबर जैन संत आचार्य प्रज्ञासागर जी महाराज का चतुर्मास कोटा (राजस्थान) में संपन्न हो रहा है। इस अवसर पर पूज्य संतश्री के सान्निध्य और मार्गदर्शन में प्रकाशित होने वाले उज्जयिनी अभिनन्दन ग्रन्थ के संदर्भ में राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं बैठक का आयोजन विगत 16- 17 अगस्त को महावीर नगर कोटा में संपन्न हुई।
राष्ट्रीय संगोष्ठी में शहर के इतिहासविद एवं ग्रंथ के सह- संपादक नरेन्द्रसिंह पॅंवार एवं संपादक डॉ सविता जैन (शीतल तीर्थ) ने भी सहभागिता की।
श्री पॅंवार ने बताया कि “उज्जयिनी अभिनन्दन ग्रन्थ” आचार्य श्री के मार्गदर्शन में प्रकाशित होनेवाला उज्जैन और मालवा के इतिहास, पुरातत्व, कला, साहित्य, संस्कृति पर केन्द्रित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ होगा। प्रकाशित होने वाले ऐतिहासिक ग्रंथ के प्रधान संपादक डॉ. अनुपम जैन (इंदौर) एवं प्रबंध संपादक अनिल कासलीवाल (उज्जैन) हैं। साथ ही संपादक एवं सह-संस्थापक मंडल भी बनाया गया है।
यह ग्रंथ दो खंडों में प्रकाशित होगा । प्रथम खंड जैन परंपरा सं संबंधित और द्वितीय खंड वैदिक परंपरा से संबंधित होगा।
जैन परंपरा वाले भाग में प्राचीन दिगंबर और श्वेताम्बर ग्रंथों में उज्जयिनी, मालवांचल का जैन पुरातत्व, मालवांचल के जैन मंदिर, तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञासागरजी का व्यक्तित्व और कृतित्व, महावीर तपोभूमि का इतिहास, तपोभूमि से संबंधित हमारे संस्मरण आदि विषय सम्मिलित होंगे।
इसी प्रकार वैदिक परंपरा वाले भाग में वैदिक साहित्य में उज्जयिनी, इतिहास और पुरातत्व में उज्जयिनी, उज्जयिनी से संबंधित प्रमुख राजवंश , नरेश एवं महापुरुष, ज्योतिष शास्त्र में उज्जैयिनी, वैदिक परंपरा के मंदिर, घाट, मठ, आश्रम तथा मालवांचल के पुस्तकालय, संग्रहालय, आदि उप-विषय रहेंगे। संगोष्ठी में श्री पॅंवार का शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मान किया गया।
श्री पॅंवार ने विद्वानों से आग्रह किया है कि उपरोक्त विषयों पर अपने आलेख लिखकर इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ के सहभागी बने । अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – नरेन्द्रसिंह पॅंवार मोबाइल नंबर 92291 95731