आज विश्व को महावीर के सिद्धांतों की आवश्यकता है – व्याख्यानी प्रियंकाश्री जी म.सा.

जावरा (अभय सुराणा) । विदुषी पूज्य महासती सरिताश्री जी महाराज साहब मधुर व्याख्यानी प्रियंकाश्री जी महाराज साहब के पावन सानिध्य में दिवाकर भवन पर पर्युषण महापर्व के छटे दिवस पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि हमारे भीतर चार शत्रु हैं- क्रोध, मान, माया और लोभ। इन्हें कषाय भी कहते हैं। कषाय अर्थात् कसना, जो आत्मा को जकड़ता है। यह चारों कषाय हमारे अंदर प्रतिपल चलते रहते हैं और कर्मबंध का कारण बनते हैं।आपने कभी विचार किया है कि किस तरह क्रोध, लोभ या अन्य कषाय आप पर हावी हो जाते हैं। जिस प्रकार अर्जुन माली जिसने क्षमा को धारण कर मात्र छह माह में अपनी आत्मा का कल्याण कर लिया जिस तरह बिना गाड़ी के चालक कहीं नहीं जा सकता है, वैसे ही कषाय भी अपने आप कुछ नहीं कर सकते उसे भी एक वाहन की आवश्यकता है।
आज विश्व में सबसे अधिक अशांति है क्योंकि सभी अधिकार जताने में लगे हैं वर्तमान में हमें परमाणु बम की आवश्यकता नहीं हैआज विश्व को महावीर के सिद्धांतों की आवश्यकता है। कषाय हमारे जीवन को दुखी कर रहा है क्रोध भयानक राक्षस के समान है और दुखों का घर है जो हमारे जीवन को खोखला कर रहा है क्रोधी व्यक्ति कभी भी संकेत को धारण नहीं कर सकता और ना ही मोक्ष गामी बन सकता है क्रोध हमें कब नहीं करना चाहिए सोमवार सौम्यता का दिवस है मंगलवार मंगलम भगवान वीरो बुधवार आत्मा की शुद्धि का दिवस है गुरुवार गुरु को वंदन नमन का दिन है शुक्रवार शुक्रिया करने का दिन है शनिवार को क्रोध नहीं करना चाहिए नहीं तो शनि देव की कृपा प्राप्त हो सकती है और रविवार तो छुट्टी का दिन होता है उसे दिन क्रोध करके आप अपनी छुट्टी को बर्बाद ना करें।
उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल टुकड़ियां एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि लगभग 21तपस्वी अट्ठम तप की ओर अग्रसर है। इसके साथ ही कई छोटी बड़ी तपस्याओ के प्रतिदिन पचकान हो रहे हैं आज प्रवचन की प्रभावना का लाभ वर्धमान जी राजमल जी माण्डोत परिवार ने प्राप्त किया।
प्रतिदिन संध्याकालीन प्रतिक्रमण रंगुजी महिला स्थानक, दिवाकर भवन एवं केसर कस्तूर स्वाध्याय भवन चौपाटी पर जिसमें प्रतिदिन श्रावक श्राविकाएं उत्साह पूर्वक भाग लेकर अपने कर्मों की निर्जरा कर रहे हैं। धर्म सभा का संचालन महावीर छाजेड़ ने किया।

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