


जावरा (अभय सुराणा ) । महासती सरिता श्रीजी म.सा. मधुर व्याख्यानी प्रियंकाश्री जी म. सा.के पावन सानिध्य में दिवाकर भवन पर पर्युषण महापर्व के सप्तम दिवस पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि जो बच्चों को केवल जन्म देते हैं और भाग्य भरोसे छोड़ देते हैं, वह सामान्य दर्जे के माँ-बाप होते हैं। जो बच्चों को जन्म को सुविधाएँ एवं संपत्ति देते हैं, वह मध्यम दर्जे के माँ-बाप होते हैं। पर जो बच्चों को जन्म और संपत्ति के साथ संस्कृति और संस्कार भी देते हैं, वह उत्तम दर्जे के माँ-बाप कहलाते हैं। बच्चों को कार जरूर दें, पर उससे पहले संस्कार दें। संस्कार रहेंगे, तो परिवार में सदाबहार खुशियाँ रहेंगी, अन्यथा खुशियों को ग्रहण लगते वक्त नहीं लगेगा। घर के बाहर कार है, यह आपकी संपत्ति का परिणाम है, पर आपकी बहू आपको गर्मागर्म खाना बनाकर अपने हाथों से परोस रही है, यह आपके संस्कारों का परिणाम है। इंसान वैसा ही बनता है, जैसा उसे सहचर्य एवं संस्कार मिलता है। गंदगी का भी अगर खाद के रूप में उपयोग किया जाए, तो वह फूल में सुगंध पैदा करने का आधार बन जाती है। कोई बड़ा होकर महावीर बनेगा या हिटलर, कोई गांधी बनेगा या गोडसे, यह उसे दिये गए संस्कारों पर निर्भर करेगा। अगर हम अपने बच्चों के मोह में अंधे धृतराष्ट बन जाएँगे, तो वह दुशासन और दुर्योधन जैसे निकल जाएँगे और उनके संस्कारों के प्रति सावधान रहेंगे, तो वह राम-कृष्ण-महावीर-बुद्ध जैसे बन जाएँगे। बच्चों को कितना भी धन क्यों न देकर चले जाओ, वह कभी भी आपको धन्यवाद नहीं देंगे। अगर बेटा सपूत है, तो धन नहीं दोगे तो भी चल जाएगा और अगर बेटा कपूत है, तो कितना भी धन दे दो, कुछ नहीं बच पाएगा। इसलिए आप अपने बच्चों को ऊँची शिक्षा के साथ ऊँचे संस्कार दें, ताकि वह न केवल अपने पाँवों पर खड़ा हो, वरन सबके लिए आदर्श बने।
संस्कारों पर ध्यान न देने की वजह से ही परिवार और रिश्ते टूटते जा रहे हैं।हम राम या महावीर बन पाएँ, तो अच्छी बात है, पर कम-से-कम श्रवणकुमार तो बन जाएँ जीवन में जो कुछ मिलता है वह विनम्रता से ही मिलता है। रावण के पास सब कुछ था, पर विनम्रता नहीं थी, इसलिए वह लोगों के दिलों में जगह न बना पाया, पर राम के पास विनम्रता थी, सो वह भगवान बन गए।बड़ों के आवाज देने पर उनके पास जाकर धीमी आवाज से जवाब दें, उनके आने पर खड़े हो जाएँ और कभी उनके स्वागत-सम्मान में कमी न आने दें। वह जो आज्ञा दें, उसे बिना तर्क पूरा कर दें। महासती ने कहा कि बच्चे इसलिए कहना नहीं मानते, क्योंकि हम उन्हें पहले ही माथे चढ़ा देते हैं। हम बच्चों का लाड़ करें, पर लाड़ में वह बिगड़ न जाएँ, इसका भी ध्यान रखें। उन्हें अनुशासन में रहना सिखाएँ। जिंदगी में अनुशासन सौ प्रतिशत सफलता पाने की नींव है।
उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष समाज भुषण इंदरमल टुकड़ियां एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि दिनांक 27 को सवंत्सरी पर्व मनाया जाएगा कल का प्रतिक्रमण पुरुषो का सागर साधना भवन महिलाओ का दिवाकर भवन एवं चोपाटी केसर कस्तूर स्वाध्याय भवन पर भी रहेगा आज के प्रवचन की प्रभावना का लाभ श्रीमती चांदबाई जी हंस्तीमल जी विरेन्द्र जी कोचट्टा परिवार ने प्राप्त किया।धर्म सभा का संचालन महावीर छाजेड़ ने किया आभार विनोद ओस्तवाल ने माना।