महापुरुषों की जयंती तभी सार्थक होगी जब हम उनके संकृल्पो को पुरा करें -विकसित मुनि

काम, क्रोध, मान, माया,व लोभ से दूर पुरूषार्थ की भावना ही व्यक्ति को महान बनाती है- महासती डॉ कुमुदलता

जावरा (अभय सुराणा )श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ जावरा के 2024 के चातुर्मास में 68 दिन का पैंसठिया महामंत्र, नवकार महामंत्र, सिध्दि महातप आदि तपस्याओ का एतिहासिक चार्तुमास करने वाले आगम मनिषी ध्यान योगी श्री विकसित मुनि जी महाराज व नवकार महामंत्र आराधक श्री वीतराग मुनि जी महाराज ने एक बार फिर श्री महावीर भवन भीलवाड़ा में 2025 के चातुर्मास में जावरा के एतिहासिक चार्तुमास की याद ताजा कर दी ।उक्त जानकारी देते हुए आल इंडिया जैन कांन्फ्रेंस दिल्ली के वरिष्ठ मार्गदर्शक सुजानमल कोचट्टा ने बताया कि कार्यक्रम के प्रारम्भ में भक्ती संध्या के साथ अहिंसा क्लश चल समारोह के बाद विशाल धर्मसभा में बदल गया। जहा महापुरूषो की जन्म जयंती क्रमशः आचार्य आत्माराम जी, प्रवर्तक श्री पदमचंद जी , श्री अमरमुनि जी, आचार्य डॉ शिवमुनि जी आदि महापुरुषों का गुणानुवाद करते हुए ध्यान योगी श्री विकसित मुनि ने कहा कि दया करूणा साधना आराधना सरलता सौम्यता माधुर्यता की साक्षात प्रतिमूर्ति उक्त महापुरुषों के जीवन को आत्मसात कर उनके बताए मार्ग पर चलकर उनके संकृल्पो को पुरा करें तभी उनकी जयंती मनाना सार्थक होगा। धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए जावरा की बेटी जावरा का गौरव श्रमण संघ की शान अनुष्ठान आराधिका विदुषी महामती डॉ कुमुदलता जी ने कहा कि काम क्रोध मान माया व लोभ पर से बहुत दूर पुरूषार्थ की भावना से व्यक्ति महान बनता है आपने ध्यान योगी विकसित मुनि जी 54 वीं जन्म जयंती पर उनकी कठौर ध्यान साधना की सराहना करते हुए कहा ध्यान साधना साधना से ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। डॉ कुमुदलता जी ने विकसित मुनि के 54 वे जन्म दिवस पर बधाई एवं शुभकामनाए देते हुए अपने साध्वी मण्डल की और आदर की चादर उन्हें ओढाने के लिए अपने प्रेतृक नगर जावरा के सुश्रावक सुजानमल कोचट्टा, सी ए यश जैन एडवोकेट, सुजानमल औरा व अजीत कुमार रांका को यह शुभ लाभ दिया। धर्म सभा को समारोह के अतिविशिष्ट अतिथि जावरा लायन्स क्लब के अध्यक्ष सीए यश जैन एडवोकेट ने भी सम्बोधित करते हुए कहा कि मेरा सौभाग्य है कि इतने विद्वानों के मध्य मुझे मंच साझा करने का अवसर गुरूदेव ने मुझे दिया मैं हृदय से उनका कृतज्ञ हूं।बस में यही कहना चाहूंगा कि हमें महावीर के परीवार में जन्म मिला है तो हमें अहिंसा के रास्ते पर पुरूषार्थ की भावना को सार्थक करना है श्री कोचट्टा ने बताया धर्मसभा में आयोजन के लाभार्थी परिवारो का श्री संध के पदाधिकारी ने मोतियों की माला व शाल श्रीफल भेंट कर बहुमान किया।समारोह के गौरव डांगी परिवार व सभी श्री संधो आस पास के शहरों से बड़ी संख्या में आए अतिथियों व भीलवाड़ा सकल श्री संघ का आभार माना। चतुर्विदि सकल श्री संध को तीन महामांगलिक सुनाते हुए सकल श्री संध की गोतम प्रसादी के साथ समारोह समाप्त हुआ।