गुरुदेव सद्भाव सागर जी म.सा. का 9 वां दीक्षा वर्ष धूमधाम से मनाया गया

रतलाम आज दिनांक 6 अक्टूबर 20 25 सोमवार को श्रुति संवर्धन वर्षा योग 2025,श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर स्टेशन रोड, रतलाम आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी म. सा. के शिष्य मुनि श्री 108 सद्भाव सागर जी म.सा. एवं क्षुल्लक 105 श्री परम योग सागर जी म.सा. द्वारा चंद्रप्रभा मंदिर मे पाट पर विराजित है।
गुरुदेव सद्भाव सागर जी मसा. का 9 वां दीक्षा दिवस धूमधाम से मनाया गया। जिसमें चंद्रप्रभ भगवान का अभिषेक, शांति धारा, पूजन, मंडल विधान संगीत के साथ संपन्न किया गया तत्पश्चात मसा.ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्री जिनेंद्र भगवान का यह दिव्य शासन पदम भुलों को संसार की शुलो से पृथक कराकर मोक्ष मार्ग की चुल्लिका तक पहुंचने वाला है। यह जिन शासन पतित को पवन बनाने वाला है यहां सब लोग आज दीक्षा दिवस मना रहे हैं हमारी वचन में प्रसंग दीक्षा का है मुनि दीक्षा धारण करने पर शिव गति की प्राप्ति होती है। जिन दीक्षा को निष्क्रमण दीक्षा भी कहते हैं। जब संसार के अतिक्रमण से पार होकर जीव वैराग्य भाव को प्राप्त होता है। जैसे-जैसे जीव को उत्कृष्ट ध्रुव नित्य स्वरूपी आत्म तत्व की प्रगति होती है उसे सुलभ से सुलभ विषय भोग भी प्रीतिकर, रुचिकर, हितकर नहीं लगते हैं। जिन-जिन को विषय भोग में रुचि है अभी उन्हें मोक्ष में रुचि नहीं है। यह निर्ग्रंथ मार्ग को वीर दीक्षा कही जाती है जिन दीक्षा को वीर दीक्षा कहा जाता है। कभी भी ज्ञान ज्ञान लेने वाला एक भी क्यों ना हो सहर्ष प्रसन्नता से ज्ञान दीजिए वह आपका दिया हुआ ज्ञान जिनशासन के लिए वरदान बन जाएगा। दूसरा जन्म दीक्षा से माना जाता है पहले गृहस्त्र पर्याय यह पापों का प्रायश्चित ही दीक्षा है यानी जिसने गृहस्थी में प्रचुर पाप किये दीक्षा लेने मात्र से उसके पहले के पापों का प्रायश्चित हो जाता है। इसलिए यह जिन दीक्षा महान महान तीर्थंकरों ने धारण की। यह जीव दीक्षा परम विशुद्धता को बढ़ाने वाली है इस विश्व में हर कोई नहीं धारण कर सकता जो विश्व वीर अर्थात कर्मों से लड़ने में योद्धा है वे ही इसे धारण कर सकते हैं। यह दीक्षा अनु उत्तर है यह लाजवाब है इसका कोई जवाब नहीं है। जो जो इस दीक्षा को धारण करता है वह आगे चलकर विश्व में सूर्य आदित्य के समान केवल विद्या को प्राप्त करता है यह दीक्षा अनुपम है अनुपम सुखों की निधि का भंडार दिलाने वाली है। आप सब लोगों को चाहिए कि जीवन में कभी भी दो अवसर कभी मत छोड़ना एक तो दीक्षा देखने का और दूसरा समाधि का, स्वाध्याय एक बार छूट जाए चलेगा परंतु यह दो काम कभी मत छोड़ना। उक्त बात अपने प्रवचन में कहीं तथा शाम को 108 दीपों से भगवान की आरती संपन्न की गई।श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन श्रावक संघ, श्री विद्या सिंधु महिला मंडल श्री विमल सन्मति युवा मंच एवं सकल दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में कथा का श्रवण कर रहे हैं उक्त जानकारी चंद्रप्रभ दिगंबर जैन श्रावक संघ संयोजक मांगीलाल जैन ने दी।