महापुरुषों के जन्मदिन को पाश्चात्य संस्कृति के ढंग से केक काटकर मनाना उनके विचारों को कुचलने के समान है – राष्ट्रीय संत कमलमुनि कमलेश

भीनमाल (72 जिनालय जैन उपाश्रय) । त्याग साधना के द्वारा जीवन जी कर आध्यात्मिक संस्कृति को पुष्पित और पल्लवित करने वाले महापुरुषों के जन्मदिन को पाश्चात्य संस्कृति के ढंग से केक काटकर मनाना उनके विचारों को कुचलने के समान है उक्त विचार राष्ट्रीय संत कमलमुनि कमलेश ने कहा कि भौतिकवाद की चकाचौंध मैं खड़ा करना उनके सिद्धांतों की होली करने के समान है । उन्होंने कहा कि पूरा विश्व आध्यात्मिक संस्कृति का लोहा मान कर अपना रहा है जिसमें स्वास्थ्य पर्यावरण और आर्थिक का की सुरक्षा निहित है
मुनि कमलेश ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति का हमला आतंकवाद से भी खतरनाक है विलासिता भौतिकवाद की चकाचौंध रोग अशांति की जननी है । जैन संत ने कहा कि आध्यात्मिक शक्ति के सहारे ही भारत को विश्व गुरु बनने का सौभाग्य मिला संतों का निर्माण हो रहा है पूरी विश्व की संपत्ति दान देकर भी आध्यात्मिकता के एक परमाणु का निर्माण सरकार विज्ञान नहीं कर सकती संस्कृति की रक्षा के बिना चरित्र का निर्माण नहीं हो सकता आचार्य प्रवर रत्नाकर सुरीश्वर जी आचार्य प्रवर रत्न संचय सुरीश्वर जी ने जनता को भारतीय संस्कृति की रक्षा का संकल्प दिलाया।

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