
भीनमाल (72 जिनालय जैन उपाश्रय) । सत्संग रूपी ज्ञान गंगा में आत्मा के पापों का प्रक्षालन होकर पावन और पवित्र बन जाती है सत्संग सबसे महान और सर्वश्रेष्ठ तीर्थ है उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने 72 जिनालय दसवीं वर्षगांठ समारोह पर संबोधित करते कहा कि सत्संग में परमात्मा का निवास है कलयुग में इससे बड़ा और कोई सहारा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अनंत काल केअज्ञान और पापों को सत्संग पल भर में मुक्ति दिला देती है।
मुनि कमलेश ने स्पष्ट कहा कि सभी धार्मिक महापुरुषों के ग्रंथ और संतों का सार सत्संग से प्राप्त होता है संत और भगवान से भी बढ़कर सत्संग है। जैन संत ने बताया कि मन विषय विकार और विचार शुद्धि के लिए रामबाण औषधि के समान है हमारे जैसे संतों का निर्माण भी इसी के माध्यम से हुआ है इससे बड़ा चमत्कार और क्या हो सकता है।
राष्ट्रसंत ने कहा कि इतिहास साक्षी है जिनको कानून और सरकार नहीं पकड़ सकी वह सत्संग में समर्पित नहीं हुए बल्कि स्थान तो बनकर सामने आए मुनि कमलेश 26 फरवरी जीरावला एवं 1 मार्च को पावापुरी 5 मार्च तक वहां की संभावना है।