
रतलाम । सहिष्णुता और आनंद एक दूसरे के पूरक हैं। यह बात सर्किल जेल में उप अधीक्षक ब्रजेश मकवाना ने सहिष्णुता दिवस पर कही। उन्होंने कहा कि जब हम दूसरों को सहन करते हैं, तो एक शांत और समृद्ध वातावरण बनता है जो आनंद के लिए आवश्यक है। सहिष्णुता की आवश्यकता सब जगह है लेकिन जेल में जो लोग आए हुए हैं उनको सहिष्णुता की अत्यधिक आवश्यकता है । उन्होंने बंदियों से आग्रह किया कि अपने स्वभाव में जिस अवगुण की वजह से जेल में आए हैं,उसे छोड़ने का संकल्प लें।
राज्य आनंद संस्थान भोपाल के निर्देशन में तथा कलेक्टर मिशा सिंह तथा आनंद विभाग रतलाम की नोडल मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रतलाम वैशाली जैन के आदेशानुसार जेल अधीक्षक लक्ष्मण सिंह भदौरिया के मार्गदर्शन में एवं उप जेल अधीक्षक ब्रजेश मकवाना की उपस्थिति में अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस के अवसर पर सर्किल जेल रतलाम में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए ।
आनंद विभाग की जिला समन्वयक सीमा अग्निहोत्री ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में सहिष्णुता, परस्पर सम्मान, संवाद और सद्भाव जैसे मूल्यों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। सहनशीलता की कमी होने से ऐसी घटनाएं होती हैं जो समाज देश और विश्व के लिए हानिकारक है। आधुनिक समय में व्यक्ति में धैर्य सहन करने की क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है।महात्मा गांधी ने सहिष्णुता के इस गुण को अपनाकर इसे अपना हथियार बनाया था। सहिष्णुता सामाजिक समरसता की आधारशिला है।विविधता को स्वीकारना और दूसरों के दृष्टिकोण को समझना किसी भी समाज की प्रगति का मार्ग बनाता है। आनंदक गिरीश सारस्वत ने कहा कि अच्छे विचारों के लिए लाइब्रेरी में उपलब्ध पुस्तकों का नियमित अध्ययन करें। विभिन्न महापुरुष महात्मा गांधी ,नेल्सन मंडेला तथा जवाहर लाल नेहरू ने जेल में रहकर समय का सदुपयोग किया। उसी प्रकार सुधार गृह में अपनी योग्यता, गुणों को विकसित कर श्रेष्ठ नागरिक बन सकते हैं। साथ ही एक रोड एक्सिडेंट के नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सहिष्णुता के संदेश को जीवंत एवं प्रभावी बनाया। डाकू रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की कहानी को शॉर्ट फिल्म के माध्यम से बताया गया,जिसे देखकर कई लोग भावुक हो गए तथा अपने अंदर बदलाव का संकल्प लिया।ब्रजेश मकवाना ने भी अपनी सहिष्णुता का परिचय देते हुए एक बंदी द्वारा की गई गलती के लिए माफ किया तो कक्ष तालियों से गूंज उठा।
कार्यक्रम के अंत में आनंदक सीमा अग्निहोत्री, पुष्पेंद्र सिंह सिसौदिया, धर्मा कोठारी, सुरेन्द्र अग्निहोत्री,गिरीश सारस्वत के साथ बंदी भाईयों तथा बहनों ने पृथक पृथक विभिन्न खेलों का आनंद लिया और उनसे जुड़ी सीख को भी समझा। सहायक जेल अधीक्षक विनोद विश्नोई ने राज्य आनंद संस्थान का आभार व्यक्त किया।