श्री श्वेतांबर जैन वरिष्ठ सेवा समिति की पहल निरंतर जारी है


जावरा (अनमोल सुराणा) । गौ माता भारतीय संस्कृति और सभ्यता का पवित्र व सम्माननीय प्रतीक है। प्राचीन काल से ही गौ माता को धर्म, संस्कृति और कृषि से जोड़ा गया है। हिंदू धर्म में गाय की पूजा की जाती है तथा उसे देवी-देवताओं का वास स्थल माना गया है। उक्त विचार श्री श्वेतांबर जैन वरिष्ठ सेवा समिति के अध्यक्ष अभय सुराणा ने संस्था द्वारा नियमित रूप से संचालित गो-सेवा कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
अभय सुराणा ने कहा कि हमारे देश में गाय को माता का दर्जा इसलिए दिया गया है, क्योंकि वह बिना किसी भेदभाव के अपने दूध से मानव जीवन का पालन-पोषण करती है। उन्होंने कहा कि “जीव दया वह धर्म है, जो बिना बोले भी संसार को सुंदर बनाता है”, और यही भारतीय संस्कृति की आत्मा है।
इस अवसर पर संस्था के ऊर्जावान सदस्य मनोहरलाल नाहटा का जन्मदिन भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सदस्यों द्वारा उन्हें शुभकामनाएं दी गईं। मनोहरलाल नाहटा ने संस्था द्वारा निरंतर चलाई जा रही सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों की सराहना करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी सदस्यों ने गौ माता को गो-ग्रास का स्वामी वात्सल्य कराया। कार्यक्रम का संचालन उपाध्यक्ष पुखराज पटवा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन सचिव राजकुमार हरण द्वारा किया गया।
इस अवसर पर बसंतीलाल चपडोद, शांतिलाल डांगी, नेमीचंद जैन, राजेंद्र कोचर, सुशील मेहता, संजय सुराणा, मनोहरलाल नाहटा, अभय सुराणा, पुखराज पटवा, राजकुमार हरण, रमणीक जैन, अनिल श्रीश्रीमाल, कमल चपडोद, प्रकाशचंद पामेचा सहित मास्टर आरुष पटवा एवं मास्टर शर्मा सहित अनेक सदस्यों की उपस्थिति रही।