सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में दिव्येशराम जी महाराज ने कहा-भगवान की कथा हमें कलिकाल के समस्त संतापों से मुक्त कर शीतलता प्रदान करती है

रतलाम श्री रामस्नेही भक्त मण्डल के तत्वावधान में श्री कालिकामाता मंदिर परिसर स्थित सत्संग सभागृह पर सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ पोथी यात्रा, पोथी पूजन, महाआरती एवं संत सम्मान के साथ हुआ। कथा से पहले पूज्य गुरूदेव श्री शंभूराम जी महाराज एवं कथा वाचक युवा रामस्नेही संत श्री दिव्येशराम जी महाराज ने मां कालिका के दर्शन व पूजा-अर्चना कर आर्शीवाद लिया।
धर्मसभा में कथा वाचक युवा रामस्नेही श्री दिव्येशराम जी महाराज ने कहा कि संसार में दो चीज बड़ी दुर्लभ है। एक संत समागम और दुसरी मुक्ति प्रदान करने वाली श्रीमद् भागवत कथा। यदि मनुष्य के मन में लक्ष्य हो तो संसार की कठीन से कठीन वस्तु भी पुरूषार्थ से प्राप्त की जा सकती है। लेकिन भगवान की कथा न बाहुबल ना धनबल और नाही पुरूषार्थ से प्राप्त की जा सकती है। यह तो भगवान की कृपा के बिना कदापि संभव नही है। संत समागम, भगवान की कथा और सद् पुरूषों का साथ भगवान की कृपा से ही प्राप्त होता है।
उन्होने कहा कि भागवत कथा मां कालिका का ही स्वरूप है। मां भगवती कालिका ने महिषासुर का विनाश किया है। जिसका विनाश भगवान शिव नही कर पाए। जिसका विनाश स्वयं नारायण नही कर पाए इन्द्र आदि देवता नही कर पाये उस महिषासुर का विनाश मां कालिका ने किया है। इस कलिकाल के समस्त दोषों का निवारण करने का सामर्थ मां भगवती कालिका रखती है। कथा हमें कलिकाल के समस्त संतापों से मुक्तकर शीतलता प्रदान करती है।
सुबह 11 बजे से दोपहर 3:30 बजे चलने वाली कथा के पहले दिन सेनेटाईजर से हाथ धुलवाकर मास्क का वितरण किया गया। महाआरती के बाद प्रसादी का वितरण किया गया।
पोथी पूजन, संत सम्मान व महाआरती मुख्य यजमान सुशीलादेवी खण्डेलवाल, मंजु-धीरज खण्डेलवाल, नीरज खण्डेलवाल, विशाल खण्डेलवाल, महेश सोनी, रामेश्वर सोनी, कांतिलाल कुमावत सहित बड़ी संख्या में उपस्थित धर्मालुजनों द्वारा की गई।

Play sound