रतलाम । यदि नरक/तिर्यंच/मनुष्य/निम्न देवलोक गति में नही जाना है तो समकित बनना होगा जो समकित यात्री बन गया वो वैमानिक देव गति में अपना स्थान सुनिश्चित कर लेता है। यदि समकित बनना है तो समकित यात्रा करनी ही होगी ये जीव आत्मा अनादिकाल से निगोद में रही है, मिथ्यात्व और नित्य निगोद से अपनी यात्रा शुरू हुई अव्यवहारिक राशि में अनन्त समय हमने व्यतीत किया। अकाम निर्जरा करते हुए हम व्हवहार राशि में पँहुचे है। यथा निवर्ति कर्म भवी जीव मोक्ष में जाएंगे लेकिन सारे भवी जीव मोक्ष में नही जाएंगे वे ही जीव मोक्ष में जाएंगे तो समकित यात्री बनेंगे।
जब तक मिथ्यात्व अवस्था रहती है तब तक समकित यात्री नही बन सकते है। मिथ्यात्व में जीव पाप करता रहता है उस पाप से कर्म का बंधन बांधता रहता है, कर्मों की सजा प्राप्त करता रहता है और नए पाप भी लगातार करता रहता है, इस प्रकार यह सायकल चलती रहती है।
पाप की मिथ्यात्व से गहरी दोस्ती है। और सम्यक्त्व मोक्ष का पासपोर्ट है। इस आत्मा का मिथ्यात्व से रिश्ता अनादिकाल से चला आ रहा है। यदि समकित यात्री बनने की तैयारी करते है तो पाप से रिश्ता कमजोर हो जाता है और मोक्ष का रिश्ता जुड़ जाता है।
मिथ्यात्व की यात्रा छीना झपटी की यात्रा है और समकित की यात्रा निवर्ति की यात्रा है । समकित यात्रा में पाप छूटता नही है लेकिन पाप के प्रति आकर्षण कम हो जाता है । पाप करने पर मन में अपराधबोध होता है। जबकि मिथ्यात्व अवस्था में पाप करने के बाद जीव खुश होता है।
जैसे सलाद खाना एक मजबूरी है लेकिन उस सलाद को विभिन्न आकार प्रकार में काट कर खुश होना मिथ्यात्व है पाप है । यदि आप बीमार हो जाए और ससुराल परिवार से कोई आपकी खबर पूछने 4 दिन तक नही आए फिर आप भले ही अच्छे हो जाएंगे लेकिन मन से बीमार हो जाएंगे अपनी श्रीमति से विवाद करेंगे शिकायत करेंगे लेकिन समकित यात्री इसका दूसरा पहलू सोचेगा वो सोचेगा की अवश्य सामने वाले की कोई मजबूरी होगी और वो मन में द्वेष नही रखेगा अपने मन को बीमार नही करेगा। समकित यात्री हमेशा दूसरा पहलू सिलेक्ट करता है समकित गुण ग्राही होता है ।
अंतर केवल मन की सोच का है, दुर्योधन को नगर में कोई सज्जन नही मिला और युधिष्टिर को उसी नगर में कोई दुर्जन नही मिला, क्योंकि हर व्यक्ति में कोई न कोई गुण होता है और कोई न कोई दोष होता है। 100त्न निर्दोष इस धरती पर नही रहते है वो तो सिद्ध शीला पर रहते है। यदि घर में टॉप क्लास का माहौल चाहिए तो थर्ड क्लास का व्यवहार छोडऩा होगा, छोटी छोटी गलतियों को इग्नोर करना गुण को ग्रहण करना यही समकित यात्रा की पहली सीढ़ी है।
समकित यात्रा पर आधारित यह 3 दिवसीय प्रवचन माला दिनांक 16 व 17मार्च को प्रात: 9 से 10 तक जारी रहेगी। दिनांक 18 से 21 मार्च तक श्रवण कुमार चारित्र पर आधारित प्रवचन माला चलेगी।