सीतामऊ में साध्वी मंडल का भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश सम्पन्न, धर्ममय वातावरण का साक्षी बना सकल जैन श्रीसंघ

सीतामऊ (नयन जैन)। जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ एवं सकल जैन श्रीसंघ, सीतामऊ के तत्वावधान में आयोजित “आत्म जागृति चातुर्मास–2026” के अंतर्गत पूज्य साध्वी रत्नरिद्धि श्रीजी म.सा. आदि ठाणा का भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नगर का संपूर्ण जैन समाज एकजुट होकर साध्वी मंडल की अगवानी में उपस्थित रहा तथा पूरा नगर धर्ममय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ प.पू. साध्वी रत्नरिद्धि श्रीजी म.सा. के मंगलाचरण एवं मंगल प्रवचन से हुआ। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में साध्वीश्री ने सीतामऊ नगरी की धार्मिक एवं ऐतिहासिक महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि “यह वह सीतामऊ नगरी है, जहाँ पाँच-पाँच जिनालयों में परमात्मा विराजमान हैं। यह वही नगरी है, जहाँ विश्वविख्यात लाइब्रेरी है और जहाँ आचार्य धर्मसागरजी महाराजा का प्रथम चातुर्मास प्राप्त हुआ था।” उन्होंने उपस्थित मूर्तिपूजक, स्थानकवासी एवं दिगंबर समाज सहित सकल जैन श्रीसंघ से भावपूर्ण निवेदन करते हुए कहा कि जिस प्रकार प्रवेश के अवसर पर सभी समाजजन एकजुट होकर उपस्थित हुए हैं, उसी प्रकार पूरे चातुर्मास के अंतिम दिन तक धर्म आराधना में सहभागी बनें।
उन्होंने प्रेरणादायी शब्दों में कहा, “झूम के बरसना सावन… ऐसा बरसना कि इस चातुर्मास में धर्म, त्याग, तपस्या और आराधना के नए कीर्तिमान स्थापित हों।” साध्वीश्री ने कहा कि चातुर्मास श्रद्धा, संयम और समर्पण का महापर्व है, जिसमें सामूहिक आराधनाओं के माध्यम से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने भगवान महावीर के दिव्य संदेश “अहिंसा परमो धर्मः” को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान भी किया। प.पू. साध्वी रत्नवृद्धि श्रीजी म.सा. ने अपने प्रवचन में कहा कि “चातुर्मास का अवसर सीतामऊ नगरी में खुशियाँ लेकर आया है। आज प्रत्येक चेहरे पर उल्लास दिखाई दे रहा है। जितना उत्साह आज प्रवेश में दिखाई दिया है, वही उत्साह पूरे चातुर्मास में बना रहना चाहिए। प्रतिदिन प्रवचन, प्रतिक्रमण एवं पाठशाला में सभी की नियमित उपस्थिति ही इस चातुर्मास की वास्तविक सफलता होगी।”
प्रेरणादायी प्रवचनों के पश्चात कार्यक्रम का संचालन करते हुए अभय ओस्तवाल ने कहा कि यह सीतामऊ नगर का सौभाग्य है कि कई वर्षों बाद इस वर्ष चातुर्मास का लाभ प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि बंधुबेलड़ी आचार्य भगवंत श्री जिन-हेमचंद्रसागर सूरीश्वरजी महाराजा के पावन आशीर्वाद से सीतामऊ की पुण्यभूमि पर साध्वी मंडल का चातुर्मास सम्पन्न हो रहा है। इस अवसर पर साध्वी रत्नवृद्धि श्रीजी म.सा. के संसारी भाई लक्षित जैन एवं साध्वी रत्नरिद्धि श्रीजी म.सा. की संसारी बहन रतलाम निवासी कविता जी पालरेचा द्वारा प्रस्तुत अभिनंदन गीत ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। धर्मसभा को सकल जैन श्रीसंघ अध्यक्ष अशोक जैन, मूर्तिपूजक श्रीसंघ अध्यक्ष डॉ. अरविंद जैन, सैलाना महारानी सा., अकलेरा श्रीसंघ ट्रस्टी नमन सुराणा, पूजा नाहर बडौद सहित अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान बाहर से पधारे विभिन्न श्रीसंघों के प्रतिनिधियों एवं अतिथियों का सम्मानपूर्वक बहुमान किया गया।

आराधना भवन में हुआ भव्य मंगल प्रवेश
धर्मसभा के पश्चात शहनाई गार्डन से भव्य प्रवेश सामैया प्रारंभ हुआ। धर्मध्वज, भजन, जयघोष एवं श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति के साथ शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई आज़ाद चौक स्थित आराधना भवन पहुँची, जहाँ शुभ विजय मुहूर्त में विधिवत रूप से जिनालय में विराजित प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान के दर्शन के बाद आराधना भवन में साध्वी मंडल का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश सम्पन्न हुआ। पूरे आयोजन के दौरान नगर में धर्म, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण बना रहा तथा बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर चातुर्मास की मंगलमयी शुरुआत का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।

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