35 जाति संगठननों के राष्ट्रीय पदाधिकारी शामिल होकर जनगणना सहित अनेक मुद्दों पर विचार विमर्श करेंगे

अयोध्या। भारतवर्षीय दि० जैन सर्वजातीय महासंघ के अंतर्गत दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर के तत्वावधान में आगामी 25 अक्टूबर 2026, रविवार को प्रातः 9 बजे भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगम्बर जैन तीर्थ, बड़ी मूर्ति, अयोध्या में दिगम्बर जैन सर्वजातीय राष्ट्रीय सम्मेलन होगा। एवं सम्मेलन के दूसरे दिन शरद पूर्णिमा 26 अक्टूबर को सर्व प्राचीन दीक्षित गणिनि प्रमुख आर्यिका ज्ञानमती माताजी का 75वां संयम दिवस एवं 93 वी जन्म जयंती भी मनाई जाएगी।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं सम्मेलन के मीडिया प्रभारी राजेंद्र जैन महावीर ने बताया कि भारतवर्षीय दिगम्बर जैन सर्वजातीय महासंघ के अध्यक्ष कर्मयोगी पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी के मार्गदर्शन तथा महामंत्री हसमुख जैन गांधी, इंदौर के संयोजन में आयोजित इस सम्मेलन में इंदौर सहित देशभर के विभिन्न दिगम्बर जैन जातीय संगठनों के पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल होंगे। हसमुख जैन गांधी ने बताया कि 84 जातियों में से लगभग 35 जातीय संगठनों के राष्ट्रीय पदाधिकारी सम्मेलन में विशेष रूप से सम्मिलित होंगे। इसके साथ ही चतुर्थ एवं पंचम जाति से पूज्य भट्टारक स्वामीजी के भी पधारने की संभावना है। इंदौर से भी 200 से अधिक प्रतिनिधि सम्मेलन में सम्मिलित होंगे।
सराक, पोंड्रा और मातंग समाज के जैन धर्म में पुनरागमन पर चर्चा
महामंत्री हसमुख जैन गांधी ने बताया कि सम्मेलन में सराक, पोंड्रा एवं मातंग समाज की जैन धर्म में वापसी भी महत्वपूर्ण विषय रहेगा। उन्होंने बताया कि इन समाजों का संबंध प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के समय से माना जाता है। कालांतर में ये समाज जैन धर्म से विमुख हो गए थे, लेकिन अब अनेक लोग पुनः जैन धर्म को स्वीकार कर धार्मिक परंपराओं एवं सिद्धांतों का पालन कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इन समाजों के निवास क्षेत्रों में जैन धर्म के प्रति बढ़ती आस्था के साथ जैन मंदिरों का भी तीव्र गति से निर्माण हो रहा है। सम्मेलन में इस धार्मिक एवं सामाजिक परिवर्तन को प्रोत्साहित करने तथा इन समाजों को मुख्यधारा से जोड़ने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
सामाजिक एकता का संदेश
सम्मेलन का मूल उद्देश्य दिगम्बर जैन समाज की विभिन्न जातियों के बीच सामाजिक एकता को मजबूत करना, जातीय संगठनों को सशक्त बनाना तथा उनके सामाजिक, धार्मिक एवं रचनात्मक कार्यों को प्रोत्साहित करना है। इसी क्रम में ‘जैन धर्म है, जाति नहीं’ की भावना को केंद्र में रखते हुए समाज की एकजुटता और व्यापक संगठनात्मक स्वरूप पर भी चर्चा होगी।
आयोजकों के अनुसार जैनधर्म की अनादिकालीन परंपरा में 84 जातियों का उल्लेख मिलता है। वर्तमान में अस्तित्व में मौजूद विभिन्न जातीय संगठनों और श्रावक – श्राविकाओं को सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न सामाजिक एवं जातिगत संगठनों को एक मंच पर लाकर जैन समाज की धार्मिक एवं सामाजिक एकता को मजबूत करना है।
आगामी जनगणना को लेकर भी होगा मंथन
सम्मेलन में आगामी जनगणना से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी विद्वानों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। जैन समाज की सामाजिक पहचान, जनसंख्या संबंधी आंकड़ों, धार्मिक पहचान तथा समाज के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर विद्वान अपने विचार रखेंगे। आयोजकों का मानना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में इस विषय पर समाज में जागरूकता और उचित मार्गदर्शन आवश्यक है।
महासंघ ने सभी जातीय संगठनों के पदाधिकारियों एवं सदस्यों से पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की आज्ञा एवं प्रेरणा को स्वीकार करते हुए अधिक से अधिक संख्या में अयोध्या पहुंचकर सम्मेलन को सफल बनाने की अपील की ।
अयोध्या में आवास एवं भोजन की व्यवस्था
अयोध्या में प्रतिनिधियों की आवास एवं भोजन की व्यवस्था अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा की जाएगी।