पर्युषण महापर्व का प्रथम दिवस श्रावक श्राविकाओं की उपस्थिति में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया


जावरा (अभय सुराणा) । जिनशासन के महानतम पर्ववाधीराज पर्युषण महापर्व का आज 8 सितंबर 2026 से प्रारंभ हुआ श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ जावरा के तत्वाधान में धर्म आराधना चातुर्मास समिति द्वारा पर्युषण महापर्व का प्रथम दिवस श्रावक श्राविकाओं की उपस्थिति में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया । इस महापर्व पर शताब्दी नायक दिवाकर शिरोमणि वरिष्ठ उपाध्याय प्रवर पूज्य गुरुदेव श्री मूलचंद जी महाराज साहब की प्रेरणा से स्थापित एवं उपप्रवर्तक श्री राकेश मुनि जी महाराज साहब द्वारा संचालित स्वाध्याय संघ के वरिष्ठ श्री लाभचंद जी नपावलिया आयम्बिल तप आराधक श्री सांवरमल जी कांठेड़ वर्धमान तप ओली आराधक श्री लालचंद जी बाफना श्रीसंघ के आग्रह पर जावरा धर्म आराधना हेतु पधारे आपके द्वारा पर्युषण महापर्व के अंतर्गत अंत-गढ़ दशांग सूत्र का वाचन किया गया । पर्युषण महापर्व पर अहिंसा का महत्व समझाते हुए आपने बताया कि अहिंसा का शाब्दिक अर्थ ‘हिंसा न करना’ या किसी भी प्राणी को चोट न पहुँचाना है। तन, मन और कर्म से: किसी भी जीव को शरीर, मन, वाणी या अपने कर्मों से कोई नुकसान न पहुँचाना। विचारों की शुद्धता: मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, अपमान या अहित का भाव न रखना। सकारात्मक प्रेम: इसका अर्थ केवल नकारात्मक रूप से हिंसा से बचना नहीं, बल्कि सभी जीवों के प्रति करुणा, क्षमा और मैत्री भाव रखना है।जैन धर्म: जैन दर्शन में इसे सर्वोच्च स्थान दिया गया है और इसका मूलमंत्र “अहिंसा परमो धर्मः” अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है। पर्युषण महापर्व पर प्रतिदिन प्रातः 6:30 बजे प्रार्थना प्रातः 8:30 बजे शास्त्र वचन प्रवचन दोपहर 2 से 3बजे धर्म चर्चा सूर्यास्त के पश्चात प्रतिक्रमण के साथ ही विभिन्न धार्मिक गतिविधियां गतिमान रहेगी प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी सामूहिक तले के पारने का आयोजन सागर साधना भवन पर 11 सितंबर को स्वर्गीय श्रीमती चंदरबाई बाबूलाल जी ओस्तवाल की स्मृति में ओस्तवाल परिवार द्वारा रखे जाएंगे धर्म आराधना चातुर्मास समिति द्वारा अधिक से अधिक तपस्या करने का निवेदन समग्र जैन समाज से किया है एवं जो भी महानुभाव तेला तप करना चाहे वह अपने नाम लिखवाने का कष्ट करें धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया प्रवचन की प्रभावना का लाभ समाजरत्न श्रीमान बसंतीलाल जी धनसुख अनुकूल अनुष चौरडिया परिवार ने प्राप्त किया।